नागरिकता संशोधन बिल पर पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ-साथ दिल्ली में भी जोरदार विरोध हो रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार इस बिल के जरिए देश में मुस्लिम समाज की उपेक्षा कर रही है और बिल के जरिए देश को हिंदुत्व के रास्ते पर धकेलने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने संसद के साथ-साथ सड़क पर भी इस बिल का विरोध किया। पार्टी ने बुधवार को बीजेपी के मुख्यालय पर भी बड़ा प्रदर्शन किया और कहा कि इस बिल के अमल में आने के बाद संविधान की मूल भावना खतरे में पड़ जाएगी। इससे आगे आने वाले समय में देश के विभाजन का रास्ता तैयार होगा। कांग्रेस ने दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में भी इस बिल का विरोध किया।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार आर्थिक मुद्दे के हर मोर्चे पर फेल साबित हुई है। इन मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए सरकार ने एनआरसी जैसा मुद्दा उछाल दिया। आज पूरे देश में उसकी आर्थिक असफलता की बजाय एनआरसी के मुद्दे पर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि देश के लोगों को केंद्र सरकार की इस चालाकी को समझना चाहिए और उससे बचकर असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि जिन लोगों की नौकरियां जा रही हैं उनके लिए सरकार क्या कर रही है।
प्रदेश अध्यक्ष के अलावा कांग्रेस के केंद्रीय नेता पीसी चाको, अरविंदर सिंह लवली और हारुन यूसुफ की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन के बाद पार्टी ने एक प्रस्ताव पास किया जिसे सभी की सहमति से पास किया गया। प्रस्ताव के मुताबिक कांग्रेस सरकार के इस बिल का हर स्तर पर विरोध करेगी। पार्टी ने कहा है कि इस कानून के कारण देश में सामाजिक अलगाव बढ़ेगा और इससे देश के विखंडन का खतरा पैदा होगा।