केरल के सबरीमाला मंदिर में हर वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति मिलने के बाद भगवान अयप्पा के भक्त नाराज हैं। कोर्ट के इस फैसले को अपनी धार्मिक परंपरा और विश्वास के खिलाफ बताते हुए भगवान अयप्पा के भक्तों ने रविवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया और इस फैसले को वापस लेने की मांग की। सैकड़ों की संख्या में महिलाएं भी इस प्रदर्शन में शामिल थीं।
एक भक्त ईपी स्वामी ने कहा कि भगवान अयप्पा आजीवन ब्रह्मचारी हैं। सिर्फ पवित्रता के लिहाज से 10 से 50 साल के बीच के उम्र की महिलाओं का प्रवेश वर्जित था। खुद महिलाएं ही इस अवस्था में मंदिर नहीं जाती हैं। ऐसे में कोर्ट का आदेश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है जो हमारी धार्मिक मान्यताओं को तोड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि मंदिर में हर जाति, हर धर्म, हर समुदाय के लोग दर्शन के लिए जा सकते हैं। किसी के साथ कोई धार्मिक भेदभाव नहीं किया जाता है। इसलिए मंदिर की भावनाओं को देखते हुए इसकी परम्परा में बेवजह दखलंदाजी नहीं की जानी चाहिए। लगभग 500 की संख्या में एकत्र भक्तों ने कीर्तन-भजन कर इस फैसले के खिलाफ अपनी भावनाओं का इजहार किया। उनका कहना था कि अगर कोर्ट और सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती तो उनका यह प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा।