गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया। भारी हंगामे के बीच उन्होंने इसे सदन में रखा जिसका विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस ने जोरदार विरोध किया। बिल को सदन में पेश किए जाने पर वोटिंग पर भी हुई जिसके बाद इस पर चर्चा शुरू हुई। अमित शाह ने सरकार का पक्ष सदन के सामने रखा।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जहां एक ओर लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश कर रहे थे वहीं संसद समेत देशभर में इस बिल का विरोध हो रहा था। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसदों ने संसद परिसर में महात्मा गांधी प्रतिमा के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया तो एआईयूडीएफ के सांसद जंतर-मंतर पर पोस्टर बैनर लेकर पहुंचे। इनका आरोप है कि सरकार धर्म के आधार पर नागरिकता की बात कर रही है जो भारत की विचारधारा से अलग है।
इसलिए इसका विरोध किया जाना चाहिए। असम के ढुबरी से एआईयूडीएफ सांसद बदरुद्दीन अजमल ने बिल को संविधान की मूल धारणा और हिंदू-मुस्लिम एकता के खिलाफ बताया। इस बिल को लेकर असम के सभी शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। लोगाें ने कहा, ये बिल 1985 में हुए असम समझौते के खिलाफ है। इससे पूर्वोत्तर में आदिवासी लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी। असम के गुवाहाटी में लोगों ने बिल के विरोध में दुकानें बंद रखीं। इसके अलावा अगरतला और पश्चिम बंगाल में भी बिल के विरोध में जगह जगह प्रदर्शन हुए।