मिजोरम के पूर्व राज्यपाल व केरल भाजपा के नेता के. राजशेखरन ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर केरल सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सीएए के खिलाफ याचिका का विरोध किया है। राजशेखरन ने अपनी याचिका में कहा कि केरल सरकार ने यह नहीं बताया है कि आखिर सीएए से राज्य व उसके लोगों के अधिकार किस तरह प्रभावित हो रहे हैं।
केरल भाजपा अध्यक्ष रहे राजशेखरन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश का हवाला देते हुए कहा, विवाद कानूनी होना चाहिए न कि राजनीतिक। साथ ही कहा कि केरल सरकार के ऑरिजनल सूट दाखिल करने व मुकदमा लड़ने में होने वाले खर्च का बोझ आम लोगों पर पड़ेगा। वाद खर्च मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट में शामिल मंत्रियों से वसूला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, केरल सरकार ने बिना राज्यपाल की सलाह के यह याचिका दायर की है, जो सही नहीं है।
सीएए और एनपीआर के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में इसारूल हक मॉंडल ने चुनौती दी है। शीर्ष कोर्ट इस मामले में 22 जनवरी को सुनवाई करेगा।
केरल के राज्यपाल बोले- तलब करेंगे रिपोर्ट
केरल राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शुक्रवार को कहा कि सीएए पर सुप्रीम कोर्ट जाकर राज्य सरकार ने सांविधानिक नियम तोड़ा है। इस मामले में वह रिपोर्ट तलब करेंगे। राज्यपाल ने कहा, सांविधानिक तंत्र का पालन कराना मेरा कर्तव्य है। मुझे सुनिश्चित करना होगा कि राज्य में नियमों का उल्लंघन न हो। संविधान में नागरिकता केंद्र का मुद्दा है। राज्य सरकार इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा रही है और मुझे सूचना नहीं दी गई। यह प्रोटोकॉल के खिलाफ है। सरकार बिना राज्यपाल की मंजूरी के कोई आदेश जारी नहीं कर सकती। जब जब ऐसा होगा मैं इसकी रिपोर्ट जरूर तलब करूंगा।
त्रिशूर : सरकारी कन्या विद्यालय के एक शिक्षक को छात्राओं से पाकिस्तान चले जाने के लिए कहने पर बर्खास्त कर दिया गया। दरअसल, केरल के इस स्कूल में हिंदी शिक्षक कलेशन ने छात्राओं को सीएए के बारे में बताना शुरू किया और फिर कहा कि जिसे इससे दिक्कत हो वो पाकिस्तान चला जाए। एक छात्रा के पिता ने इस मामले को सोशल मीडिया पर उठाया जिसके बाद शिक्षा विभाग के उप निदेशक ने कलेशन को बर्खास्त कर दिया।
कोझिकोड : बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने शुक्रवार को नागरिकता संशोधन कानून को बहुत अच्छा और उदार बताते हुए सरकार से इसमें खुले विचार वाले मुस्लिमों को भी जगह देने की मांग की। केरल लिट्रेचर फेस्ट में नसरीन ने कहा, यह बहुत अच्छा है कि पड़ोसी मुल्कों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए कानून बना है। लेकिन मुझे लगता है कि मेरी ही तरह कई नारीवादी और धर्मनिरपेक्ष मुस्लिमों को भी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में प्रताड़नाएं झेलनी पड़ती हैं। केंद्र सरकार को चाहिए कि ऐसे मुस्लिमों को भी भारत में जगह दी जाए।