सैन्य अफसरों की आधी पेंशन काटने के मसले को लेकर कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला है। कांग्रेस पार्टी के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा, केंद्र की मोदी सरकार सेना के अधिकारियों के साथ धोखा कर रही है। सैन्य अफसरों के हितों पर कुठाराघात कर रही है। अफसरों की आधी पेंशन काट कर सेना का मनोबल गिरा रही है।
शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, शहीद सैनिकों की वीरता और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट बटोरने वाली मोदी सरकार देश के इतिहास की पहली सरकार बनने जा रही है, जो सीमा पर रोजाना अपनी जान की बाजी लगाने वाले सैन्य अफसरों की पेंशन काटने और ‘सक्रिय सेवा’ के बाद उनके दूसरे करियर विकल्प पर डाका डालने की तैयारी में है। एक तरफ तो स्वांग रच प्रधानमंत्री मोदी सेना के लिए दिया जलाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ साहसी और बहादुर सैन्य अफसरों के जीवन में उनकी पेंशन काट अंधेरा फैलाने का दुस्साहस कर रहे हैं। यही भाजपा का झूठा राष्ट्रवाद है।
कांग्रेस महासचिव ने कहा, सेना में भर्ती यानि ‘सैन्य कमीशन’ के समय ‘इंडियन मिलिटरी एकेडमी’ में हर अधिकारी से 20 साल का अनिवार्य सर्विस बॉन्ड भरवाया जाता है। 20 साल की सेवा के बाद सैन्य अफसर अपनी आखिरी सैलरी यानि 20 साल की सेवा पूरी होने पर जो मूल तनख्वाह मिल रही हो, उसकी 50 फीसदी पेंशन पाने का हकदार है। लेकिन मोदी सरकार का ताजा सेना विरोधी प्रस्ताव उस 50 फीसदी पेंशन को भी आधी कर देने का है।
सुरेजवाला ने कहा, सेना में भर्ती हुए 100 अफसरों में से औसतन 65 फीसदी सैन्य अफसर लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक ही सीमित रह जाते हैं। केवल 35 फीसदी अधिकारी ही कर्नल या उससे ऊपर के पदों पर जा पाते हैं। ऐसे में 20 साल सेवाएं देने के बाद वो सैन्य अधिकारी पूरी पेंशन के साथ जिंदगी में एक दूसरा करियर विकल्प तलाश कर लेते हैं और प्रभावी तरीके से राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देते हैं। सेना को इसका सीधा फायदा यह है कि फौज सदा युवा बनी रहती है। अगर मोदी सरकार की ये प्रस्तावना लागू हो जाएगी, तो सदा के लिए 65 फीसदी सैन्य अफसरों का दूसरा करियर विकल्प भी खत्म हो जाएगा और सेना से बाहर सिविलियन क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण में उनका रचनात्मक सहयोग भी।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नई प्रस्तावना के मुताबिक केवल उस सैन्य अफसर को पूरी पेंशन मिलेगी, जिसने 35 साल से अधिक सेना की सेवा में बिताए हों। परंतु सेना के 90 फीसदी अफसर तो 35 साल की सेवा से पहले ही रिटायर हो जाते हैं। ऐसे में मोदी सरकार 90 फीसदी सेना के अफसरों को पूरी पेंशन से वंचित करने का षडयंत्र कर रही है। सैन्य अफसरों की सेवाओं की शर्तों को भी पिछली तारीख से संशोधित नहीं किया जा सकता।
तीनों सेनाओं में पहले ही 9,427 अफसरों की कमी
केंद्र सरकार से कांग्रेस ने सवाल किया कि जब सेना में भर्ती होते वक्त 20 साल की अनिवार्य सेवा और 20 साल के बाद फुल पेंशन पर रिटायरमेंट की शर्त रखी गई है, तो आज मोदी सरकार उन सारी सेवा शर्तों को कैसे संशोधित कर सकती है। इससे सैन्य अधिकारियों का मनोबल टूटेगा।
सुरजेवाला ने कहा कि भारत की तीनों सेनाओं में पहले से ही 9,427 अफसरों की कमी है। जून, 2019 के आंकड़े बताते हैं कि थल सेना में 7,399, नौसेना में 1,545 और वायु सेना में 483 अफसर कम हैं। मोदी सरकार की सेना का मनोबल तोड़ने वाली इस प्रस्तावना से देश के युवाओं का सेना में भर्ती होने के प्रति आकर्षण घटेगा तथा आखिर में देश का नुकसान होगा।
मोदी सरकार लगातार कर ही है सेना विरोधी कार्य
मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस महासचिव सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार ने आज तक ‘वन रैंक, वन पेंशन’ लागू नहीं की। सेना की ‘नॉन फंक्शनल यूटिलिटी बेनेफिट स्कीम’ खत्म कर दी, जिसे कांग्रेस की सरकार ने लागू किया था ताकि ऑटोमैटिक टाइम बाउंड पे प्रमोशन हो सकें। मोदी सरकार ने सियाचिन और लद्दाख में सैनिकों के लिए खरीदे जाने वाले सर्दी के इक्विपमेंट, जूते, बुलेटप्रूफ जैकेट की खरीद में भयंकर देरी की। वहीं, सरकार ने डिसेबिलिटी पेंशन पाने वाले सेना के अधिकारियों तथा सैनिकों पर टैक्स भी लगा दिया।