एक निजी बिल के जरिये मातृत्व अवकाश की तरह सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों को पितृत्व अवकाश देने का प्रस्ताव पेश किया गया है। चाहे वह असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी ही क्यों न हों। इसी साल मातृत्व अवकाश को बढ़ा कर 26 हफ्ते किया गया है।
पितृत्व लाभ विधेयक-2017 पर संसद के अगले सत्र में विचार किया जा सकता है। इस विधेयक में नवजात के माता-पिता दोनों को समान लाभ देने का प्रस्ताव किया गया है। कांग्रेस सांसद राजीव सातव ने अपने बिल में कहा है कि बच्चे की देखभाल माता-पिता दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है।
इसलिए पिता को भी नवजात की देखभाल के लिए उचित समय मिलना चाहिए। सांसद ने कहा प्रस्तावित बिल से निजी और असंगठित क्षेत्र के 32 करोड़ से ज्यादा पुरुषों को लाभ होगा। मौजूदा समय में ऑल इंडिया एंड सेंट्रल सिविल सर्विसेज कानून के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को 15 दिनों का पितृत्व अवकाश मिलता है।
कई कॉरपोरेट दफ्तर भी अपने कर्मचारियों को पितृत्व अवकाश की सुविधा देते हैं। सांसद ने कहा कि इस बिल से न केवल छुट्टी की अवधि बढ़ेगी, बल्कि सभी क्षेत्र के कामगारों को पितृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा।
इस साल के शुरू में लोकसभा ने एक संशोधन विधेयक को पास किया है, जिसमें कामकाजी महिलाओं के पहले दो बच्चों के लिए 12 हफ्ते के मातृत्व अवकाश को बढ़ा कर 26 हफ्ते किया गया था। इस पर चर्चा के दौरान सदस्यों ने कहा था कि इस कानून में कमी है, क्योंकि इसमें पितृत्व अवकाश का कोई प्रस्ताव नहीं है।