विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर नई मसौदा नीति में प्रस्ताव दिया गया है कि संबंधित मंत्रालयों में वैज्ञानिकों की लेटरल भर्ती और यह संख्या कुल भर्ती की 25 फीसदी होनी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, इसका मकसद विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नित प्रतिदिन हो रहे बदलाव संबंध मुद्दों से निपटने के लिए विज्ञान संबंधी मंत्रालयों में विशेषज्ञों की आवश्यकता को पूरा करना है।
विज्ञान प्रौद्योगिकी और इनोवेशन नीति (एसटीआईपी) 2020 के मसौदे के अनुसार, ये स्वायत्त संस्थानों या निजी क्षेत्र से विभिन्न फील्ड में महारत रखने वाले वैज्ञानिक हो सकते हैं। इसके अनुसार, विज्ञान संबंधी सभी मंत्रालयों में न्यूनतम 25 फीसदी लेटरल भर्ती पेशेवरों और विषय संबंधी विशेषज्ञों की होनी चाहिए।
साथ ही इन्हें एक नियत अवधि के लिए जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग में सचिव आशुतोष शर्मा ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी ऐसा क्षेत्र है जहां रोजाना बदलाव हो रहा है, ऐसे में मंत्रालयों में विशेषज्ञों की जरूरत है।
विज्ञान संबंधित मंत्रालयों और विभागों में शीर्ष पदों के लिए आमतौर पर विज्ञापन निकाला जाता है लेकिन यदि मसौदा नीति स्वीकार कर ली जाती है तो मध्य स्तर पर भी विशेषज्ञों की लेटरल एंट्री हो सकेगी। वर्तमान में विज्ञान संबंधी मंत्रालयों के स्वायत्त संस्थानों में पदों के लिए डोमेन विशेषज्ञ आवेदन कर सकते हैं।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने पिछले साल एसटीआईपी 2020 को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसे पिछले साल के अंत तक पेश किया जाना था लेकिन कोरोना वायरस महामारी के चलते देरी हुई। डीएसटी ने अपनी वेबसाइट पर इस मसौदा नीति को अपलोेड किया है और 25 जनवरी तक लोगों से सुझाव, इनपुट और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।