कई वर्षों से केंद्र और राज्य सरकार के टकराव, भूमि अधिग्रहण और अफसरशाही में उलझी 1.26 लाख करोड़ रुपये की 116 बुनियादी ढांचा परियोजना को जल्द ही बंद किया जा सकता है। सरकार अब तक इन योजनाओं पर 20,311 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय कर चुकी है। लेकिन योजनाओं में गति नहीं मिलती देख अब इन्हें पूरी तरह से बंद करने का मन बना रही है।
हाल ही में नीति आयोग द्वारा तैयार की एक आंतरिक रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने करीब 116 ऐसी परियोजनाओं को चिह्नित किया है, जिन्हें बंद करने या रद्द करने पर विचार किया जा रहा है। इनमें परियोजना रेलवे और सड़क क्षेत्र से जुड़ी हैं। रेलवे की बात करें तो 50 परियोजनाओं को रोका जाएगा (इनमें से कुछ को 40 साल पहले स्वीकृति दी गई थी) और 15 को अभी मंजूरी भी नहीं मिली है। इसी तरह सड़क क्षेत्र की 33 परियोजनाओं को बंद या निलंबित किया जा सकता है।
रिपोर्ट में सामने आया कि रेलवे की अटकी परियोजनाओं की लागत 49 फीसदी बढ़कर 88,373 करोड़ रुपये हो गईं। रेलवे की 72 परियोजनाओं पर अब तक कुल 8,500 करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत व्यय किया जा चुका है। इसी तरह सड़क परिवहन और राजमार्ग की 33 परियोजनाएं लंबे समय से अटकी हुई हैं, जिनकी लागत में 6 फीसदी का इजाफा हुआ है। इन परियोजनाओं पर अब तक 11,000 करोड़ रुपये का खर्च हो चुके हैं।
दरअसल, आयोग जिन 116 परियोजनाओं को बंद करने का विचार कर रहा है, इनमें 55 से अधिक परियोजनाओं पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच भूमि अधिग्रहण विवाद चल रहा है। या फिर ये योजनाएं या फिर अफसरशाही के रवैये के कारण अटकी हुई हैं। आयोग की रिपोर्ट में संबंधित मंत्रालयों ने राज्य सरकारों द्वारा जमीन अधिग्रहण की मंजूरी नहीं देने या जरूरी मंजूरी नहीं देने की बात भी सामने आई है।
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2023 के बजट में रेलवे और सड़क परिवहन विभाग को नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास के लिए सबसे अधिक धन का आवंटन किया गया था। लेकिन दशकों से लंबित परियोजनाओं में पैसे डूबने से वित्तीय कुशलता को लेकर भी चिंता खड़ी होती है। इनमें से अधिकांश परियोजनाओं की जगह नई परियोजनाएं लाई जा सकती हैं। कई परियोजनाओं में देरी की वजह से उनकी लागत में भी लगातार इजाफा हुआ है।