मुसलमानों के मन से मोदी सरकार के प्रति नकारात्मक सोच दूर करने, उनका सियासी शोषण रोकने के लिए शुरू की गई प्रोग्रेस पंचायत यूपी में फिलहाल नहीं होगी। इसकी वजह वोट के लिए मुसलमानों से दोस्ती की तोहमत से बचना माना जा रहा है। दिल्ली में इस कार्यक्रम का जोरशोर से समापन होगा, जिसमें प्रधानमंत्री के शिरकत करने की बात कही जा रही है।
मुसलमानों को मुख्यधारा से जोड़ने की योजना के तहत सरकार आगे बढ़ रही है। प्रोग्रेस पंचायत करना उसी कड़ी का हिस्सा है। अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मुख्तार अब्बास नकवी इन पंचायतों की रहनुमाई कर रहे हैं। हरियाणा के मेवात से बृहस्पतिवार को शुरू हुए पंचायत के कारवां का अगला पड़ाव अब राजस्थान होगा। 6 अक्तूबर को वहां पर नकवी कई प्रोग्रेस पंचायत करेंगे, लेकिन अभी यूपी एजेंडे में शामिल नहीं है। मुमकिन है कि आगे इसको शामिल कर लिया जाए।
दरअसल, भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि प्रोग्रेस पंचायत का मकसद मुस्लिमों से वोट का सौदा नहीं बल्कि विकास का मसौदा है। इसलिए पहले उन प्रदेशों के मुस्मिल बहुल इलाकों को फोकस किया जा रहा है, जहां कई साल अभी चुनाव नहीं हैं। जैसे हरियाणा और राजस्थान में चुनाव होने में अभी लंबा वक्त है।