भारत रत्न प्राप्त देश के मशहूर वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव इस साल रसायन शास्त्र के नोबेल पुरस्कार से ठीक उसी तरह चूक गए हैं जैसे कॉफी का कोई कप होठों तक आते-आते छूट जाए।
हालांकि प्रो. राव ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि पुरस्कार देने वाली रॉयल सोसायटी के मेरे कई मित्रों ने मुझे पत्र लिखकर यह इच्छा जाहिर की है कि अगली बार मैं इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को जीतूंगा। इच्छा जाहिर करने वालों में लंदन स्थित सोसायटी के उपाध्यक्ष एंथोनी चीथम भी शामिल हैं।
प्रो. राव के हाथ में आते-आते छूटने वाले इस साल के नोबेल पुरस्कार का यह रहस्योद्घाटन प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘कैमिस्ट्री व्यू’ ने अपने एक सर्वे के प्रकाशन के बाद किया।
प्रो. राव को दुनिया भर में हुए सर्वे में मिले सर्वाधिक मत
सर्वे के परिणाम रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंस की ओर से इस साल के लिए नोबेल पुरस्कारों की घोषणा करने के 15 दिनों बाद जारी किए गए हैं। दुनिया भर में कराए गए इस सर्वे में प्रोफेसर सीएनआर राव को उनकी खोज के लिए रसायन शास्त्रियों ने साल 2016 के नोबेल पुरस्कार के लिए सबसे ज्यादा वोट दिए थे।
प्रोफेसर राव ने यह भी कहा कि - ‘‘मैं इस फैसले से चकित हूं क्योंकि सर्वे के पोल के लिहाज से मैं दूसरों से काफी आगे था।’’ सूत्र बताते हैं कि प्रो. राव को इस साल का नोबेल अवार्ड नहीं मिलने का एक कारण यह भी हो सकता है कि रॉयल सोसायटी के चार सदस्यीय ज्यूरी सदस्यों में से दो सदस्य बॉयोलॉजिस्ट थे।
इन दो सदस्यों में से एक भारतीय मूल के अमेरिकी कैंकटरमन वैंकी रामकृष्णन स्ट्रक्चरल बायोलॉजिस्ट थे जो सोसायटी के वर्तमान अध्यक्ष भी थे।
तीन वैज्ञानिकों को मिला था 2016 का नोबेल
इस साल का नोबेल पुरस्कार ‘डिजाइन एंड सिंथेसिस ऑफ मॉलिक्यूलर मशीन्स’ के लिए जीन पियरे सौवेज (फ्रांस), सर जे फ्रेजर स्टोडार्ट (यूएसए) और बर्नार्ड एल फेरिंगा (नीदरलैंड) को दिया गया है।
प्रतिष्ठित पुरस्कार के विजेताओं की घोषणा करते हुए एकेडमी ने 5 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि रसायन विज्ञान में 2016 के नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने छोटी मशीन बनाकर केमिस्ट्री को एक नया आयाम दिया है।