सरकार जननी सुरक्षा योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, चिकित्सकों के लिए अस्पताल परिसर के पास आवास दिए जा रहे हैं लेकिन गांव-गिरांव की गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए स्वास्थ्य महकमा संवेदनशील नहीं है।
मोहम्मदी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक गर्भवती महिला तीन घंटे तक दर्द से तड़पती रही लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। स्टाफ ने उसे भर्ती नहीं किया और परिसर के आवास में रहने वाली महिला डॉक्टर उसे देखने तक नहीं आईं। घरवाले सुबह जच्चा बच्चा को ले गए। शनिवार रात ब्लाक क्षेत्र के गांव पाल अभय कचनार निवासी प्रमोद की पत्नी सरिता को प्रसव पीड़ा हुई। प्रमोद ने 102 नंबर एंबुलेंस को कॉल किया। एंबुलेंस गांव से सरिता को रात नौ बजे सीएचसी मोहम्मदी ले आई।
यहां ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स प्रीति कश्यप ने उन्हें देखा और छोटा आपरेशन करने की बात कहकर सुबह तीन बजे आने को कहा। सरिता की हालत बिगड़ने पर प्रमोद और उनके साथ आई महिलाओं ने नर्स से काफी देर तक गुहार लगाई तथा डॉक्टर से मिलवाने के लिए कहा। स्टाफ नर्स ने अस्पताल परिसर में रह रही डॉ अंजना सिंह को फोन किया, तो मोबाइल बंद मिला।