2024 के लोकसभा चुनाव की गर्माहट अब धीरे-धीरे बढ़ रही है। इस चुनावी माहौल के बीच प्रोबो एप ने एक डिजिटल ओपिनियन पोल पूरा किया है। प्रोबो का दावा है कि उसकी एप पर तीन करोड़ लोगों ने अपने विचार साझा किए हैं, जिससे चुनाव में देश की नब्ज को समझने में काफी आसानी हुई है। इस एप पर लोगों से कुछ अहम सवाल पूछे गए, जिनके जवाब लोगों ने उत्साह से दिए। प्रोबो ने इन नतीजों को सामने भी रखा है।
एनडीए की संभावना और जनता की राय
एनडीए के सबसे बड़े नारे - 'इस बार 400 पार' के आधार पर प्रोबो एप पर एनडीए की 360 या उससे ज़्यादा सीट जीतने पर सवाल किया गया। प्रोबो का दावा है कि इसमें जनता की राय अलग अलग देखी गई। शुरुआत में लगभग 80% हां की संभावना देखी गई, और अब यह 60% पर आकर स्थिर हो गया है। ऐसे में प्रोबो के विश्लेषण में माना जा रहा है कि लोग एनडीए की जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं।
भाजपा और कांग्रेस की उम्मीदें
बीजेपी के 330 सीटें जीतने के सवाल पर भी काफी चर्चा हुई। 2 जून तक हां की संभावना 45% तक देखी गई। ऐसे में प्रोबो पर जनता का रुख भाजपा के 310-350 सीटों की तरफ ज्यादा दर्ज हुआ। यह आंकड़े संभावनाओं को दर्शाते हैं और जनता के मत या अनुमान को व्यक्त करते हैं। वहीं, कांग्रेस के 85 सीटें जीतने की संभावना पर लोगों का विश्वास लगातार घटता गया। प्रोबो ने पोल के हवाले से दावा किया कि कांग्रेस के प्रति जनता का विश्वास कम होता जा रहा है।
चर्चा में कंगना रनौत और कन्हैया कुमार
मंडी से कंगना रनौत के चुनाव लड़ने और जीतने के सवाल पर जनता की राय में सबसे ज्यादा अस्थिरता देखी गई। शुरुआत में कंगना रनौत के मंडी से जीतने की 65% संभावना देखी गई, जो अब 80% पर स्थिर हो गई है। प्रोबो के मुताबिक, यह कंगना के स्टारडम और उनकी राजनीतिक एंट्री को लेकर जनता की दिलचस्पी को दर्शाता है।
वहीं, पूर्वोत्तर दिल्ली से कन्हैया कुमार के चुनाव जीतने के सवाल पर बेहद कम लोग विश्वास जता रहे हैं। उनके जीतने की सम्भावना प्रोबो पर केवल 25% चल रही है। प्रोबो के मुताबिक, कन्हैया की संघर्षपूर्ण राजनीति और उनकी विवादास्पद छवि शायद उनके पक्ष में काम नहीं कर रही है।
पश्चिम बंगाल में मिजाज बदलने का दावा
पश्चिम बंगाल में क्या टीएमसी सबसे बड़ी पार्टी उभर कर बाहर आएगी? इस सवाल पर लोगों की राय में टीएमसी के लिए समर्थन घटा है। शुरुआत में 60% हां का समर्थन था, लेकिन अब यह घटकर 30% रह गया है। लोग अब भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। प्रोबो के मुताबिक, यह बदलाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े परिवर्तन की ओर इशारा कर रहा था।