जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल फोटो)
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को कहा, हाईकोर्टों द्वारा कंप्यूटर युग में कट, कॉपी और पेस्ट (आदेशों की नकल और उसे ज्यों का त्यों चिपका देना) की प्रक्रिया अपनाए जाने से हम तंग आ गए हैं। हाईकोर्टों को अपने आदेशों में अपने विवेक का स्वतंत्रता से इस्तेमाल करना चाहिए। आदेश की नकल करना और उसे वैसे ही चिपका देना, कंप्यूटर युग की समस्याओं में से एक है।
उन्होंने कहा, किसी आदेश की पुष्टि के लिए स्वतंत्र वजहों का हवाला दिया जाना चाहिए। विवेक का स्वतंत्र प्रयोग होना चाहिए। न्यायाधिकरण के फैसले के कट, कॉपी, पेस्ट केवल पृष्ठों की संख्या बढ़ाता है, लेकिन अपील के मुख्य मुद्दे का जवाब नहीं देता है।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने यह अहम टिप्पणी उड़ीसा हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की याचिका पर दी। उड़ीसा हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें कहा गया था कि एक व्यक्ति को 2011 में अनुशासनात्मक कार्रवाई के चलते आईएएस कैडर देने से इनकार कर दिया था।
पीठ ने कहा, यह अनुच्छेद 320 के तहत यूपीएससी के नियम हैं न कि कार्मिक विभाग के दिशा-निर्देश। पीठ ने बिभु प्रसाद सारंगी और अन्य के मामले में उड़ीसा हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए यूपीएससी की याचिका स्वीकार कर ली। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, हाईकोर्ट ने इस मामले में अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया, केवल न्यायाधिकरण के आदेश की नकल की गई।