यूपी में गठबंधन के बाद प्रियंका वाड्रा की सक्रियता और भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस में एक धड़ा ऐसा है जो कतई नहीं चाहता कि राहुल गांधी पार्टी की कमान संभाल लें। लिहाजा पार्टी के भीतर प्रियंका को राहुल के बराबर खड़ा करने की कोशिशें फिर होने लगी हैं। जबकि सच्चाई ये है कि प्रियंका लंबे समय से राहुल की गैरमौजूदगी में यूपी से जुड़ी अहम बैठकों में शामिल होती रही हैं। इतना ही नहीं तालकटोरा स्टेडियम में हुए कांग्रेस के सम्मेलन में प्रियंका ने पर्दे के पीछे से अहम भूमिका निभाई थी जिसकी जानकारी पार्टी के गिने-चुने नेताओं को ही थी।
यूपी में समाजवादी पार्टी से गठबंधन को लेकर प्रियंका दो महीनों से सक्रिय थीं और डिंपल यादव के साथ उनकी लगातार बातचीत भी हो रही थी। कांग्रेस ने सोमवार को स्पष्ट किया प्रियंका वाड्रा को सपा से गठबंधन की बातचीत के लिए उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ही अधिकृत किया था।
प्रियंका पार्टी में बिना पद किस तरह से काम कर रही हैं इस सवाल पर प्रवक्ता डा. अजय कुमार ने कहा कि प्रियंका वाड्रा लंबे समय से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्रों में सक्रिय हैं। इतना ही नहीं कांग्रेस कार्यकर्ता भी उन्हें पसंद करते हैं।
उनका कहना है कि सपा के साथ गठबंधन की बातचीत शुरू करने और आगे बढ़ाने का जिम्मा खुद राहुल गांधी और प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने प्रियंका को सौंपा था। उनकी निजता को ध्यान में रखकर ही पार्टी उनसे अनुरोध करती है। पार्टी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष किसी से भी कोई काम ले सकते हैं। प्रियंका के काम करने से पार्टी यूपी में दोनों लोकसभा सीटें जीतती आई है। गठबंधन में भी पार्टी को सफलता मिली है।