दोनों परिवारों की दोस्ती इलाहाबाद में रहने के जमाने से है। आनंद भवन के जमाने में सरोजिनी नायडू ने हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन की मुलाकात जवाहर लाल नेहरू से कराई थी। इसके बाद से इन दोनों परिवारों के बीच दोस्ती बढ़ती चली गई। राजीव गांधी, संजय गांधी का बचपन अमिताभ बच्चन और उनके भाई अजिताभ के साथ ही खेलते हुए बीता। 1983 में कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान जब अमिताभ घायल हुए, तब पीएम रहते हुए इंदिरा गांधी उन्हें अस्पताल में देखने गईं।
बच्चन परिवार के घर में रहीं बहू सोनिया
जब राजीव गांधी ने विदेश में रहने वाली सोनिया गांधी से शादी का फैसला किया तो इंदिरा गांधी ने शादी से पहले सोनिया के ठहरने का इंतजाम बच्चन परिवार के यहां ही किया। इंदिरा चाहती थीं कि सोनिया वहां रहकर हिंदुस्तानी संस्कार सीखें। सोनिया 40 से भी ज्यादा दिनों तक बच्चन परिवार के साथ रहीं और तेजी बच्चन ने उन्हें बेटी की तरह रखा।
इस सियासी भूचाल से आई दोस्ती में दरार
आपातकाल के दौरान ही दोनों परिवारों में दूरियां बढ़ने लगी थीं। मगर इंदिरा की हत्या के बाद राजीव के कहने पर अमिताभ बच्चन ने चुनाव लड़ा और इलाहाबाद से जीत दर्ज की। मगर जल्द ही उनका नाम राजीव के साथ बोफोर्स घोटाले में आ गया। इससे व्यथित होकर उन्होंने राजनीति से अलग होने का फैसला किया। इसके बाद दोनों परिवारों में दूरियां लगातार बढ़ती चली गई। यहां तक कि 2007 में अमिताभ की मां तेजी बच्चन के अंतिम संस्कार में भी गांधी परिवार से कोई शामिल नहीं हुआ।