ये बेवजह नहीं है कि 2016 के दौरान उनकी तुलना इंदिरा से करते हुए कई पोस्टर पहले राजस्थान और फिर उत्तर प्रदेश में भी नजर आए।
प्रियंका बेबाक हैं, बेलौस हैं। उनकी जुबान बेहद साफ है। भाषणों का तेवर भी, जहां जरूरत हो वहां नरम और जहां जरूरत हो वहां भरपूर हमलावर। वो अपने भाषणों में इंदिरा गांधी को याद करना नहीं भूलतीं। 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान रायबरेली में प्रियंका ने कहा था,
"मैंने इंदिराजी से सीखा था कि जब सच्चाई दिल में होती है, जब दिल का इरादा सही होता है तो एक कवच बन जाता है छाती के अंदर...जितना जलील करते हैं, उतना मजबूत बनता है।"
बतौर महासचिव, प्रियंका अपनी नई जिम्मेदारी को तैयार हैं। उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है। नहीं भूलना चाहिए कि ये योगी आदित्यनाथ का गढ़ है तो प्रधानमंत्री मोदी का चुनाव क्षेत्र बनारस भी यहीं है। प्रियंका के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन दिग्गजों निपटने की होगी।