ट्विटर पर अपना बयान जारी कर रमानी ने लिखा कि, 'पिछले दो सप्ताह में पत्रकार समेत अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं ने कामकाज के दौरान कई संपादकों और लेखकों और फिल्मी दुनिया से जुड़े लोगों को यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। इससे पता चलता है कि पिछले कुछ सालों में महिलाओं का धीरे-धीरे ही सही पर सशक्तिकरण हो रहा है। वह लिखती हैं कि #Metoo मूवमेंट ने महिलाओं को एक आवाज दी है।'
उन्होंने अपने बयान में लिखा है, अकबर जब महिलाओं के साथ अशलील हरकतें कर रहे थे तब वह महिलाएं उनके अधीन काम कर रही थीं, जब जब महिलाओं ने आवाज उठाने की कोशिश की तब-तब उनके साथ कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें चुप होना पड़ा। जिसने भी अकबर के खिलाफ बोलने की हिम्मत की उसने अपने निजी और प्रफेशनल जिंदगी को खतरे में डाला है।
अकबर अंग्रेजी मीडिया के जाने माने नाम रहे हैं। अब यह पूछा जा रहा है कि इस बारे में शिकायत अभी क्यों की जा रही है, तो मैं यह कहना चाहती हूं कि हम सभी जानते हैं कि पीड़ितों के सेक्सुअल आरोपों के बाद की शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है वही स्थिति आज भी बनाई जा रही है। इन महिलाओं के आरोपों पर सवाल उठाने की जगह हमें कामकाज के लिए आने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान देना चाहिए और यह कोशिश करनी चाहिए कि आने वाली पीढ़ी के लिए हम कैसे एक सुरक्षित स्थान दें।