केंद्र सरकार अपने कर्मियों को चुस्त-दुरुस्त बनाने और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए कई तरह के कोर्स शुरू कर रही है। इन कोर्सों की अवधि भी ज्यादा लंबी नहीं है। अगर कोई कर्मचारी ये कोर्स कर लेता है तो उसे विभागीय फायदा मिलता है। इसमें पदोन्नति भी शामिल है। खासतौर पर मंत्रियों और बड़े अफसरों के निजी सचिवों के लिए ये कोर्स जरूरी बताए गए हैं। निजी सचिवों को यह कोर्स करने के लिए कहीं बाहर नहीं जाना है। सचिवालय प्रशिक्षण एवं प्रबंध संस्थान, नई दिल्ली में 18 दिन का कोर्स होगा। कोर्स का ज्यादातर हिस्सा ऑनलाइन रहेगा।
डीओपीटी की तरफ से तैयार प्रक्रिया के तहत केंद्र सरकार में वे निजी सचिव, जो केंद्रीय सचिवालय सेवा (सीएसएस) के तहत आते हैं, इस कोर्स के पात्र होंगे। यह कोर्स 16 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलेगा। कोर्स में बताया जाएगा कि मौजूदा कार्यक्षमता किस तरह बढ़ाई जा सकती है। प्रशासनिक इकाइयों के बीच तालमेल और गैर सरकारी संस्थानों की गतिविधियां जैसी अनेक बातें इस कोर्स का हिस्सा रहती हैं।
यह माना जाता है कि सीएसएस के अधिकारी केंद्रीय सरकार के मंत्रालयों/विभागों की रीढ़ होते हैं तथा वे संयुक्त सचिव स्तर तक के विभिन्न पदों को धारण करते हैं। सीएसएस अधिकारियों के मुख्य दायित्वों में नीति निर्माण, कार्यान्वयन, पर्यवेक्षण तथा समीक्षा आदि शामिल होता है। इन सब मामलों में उन्हें दक्ष बनाया जाता है। यह कोर्स करने के बाद उन्हें पदोन्नति का लाभ हासिल करने में सुविधा होती है।
यदि कोई अधिकारी या कर्मी, इस कोर्स को नहीं करते हैं या बीच में छोड़कर चले जाते हैं तो उनकी प्रमोशन में बाधा आनी तय है। कोर्स के बारे में डीओपीटी ने स्पष्ट तौर पर लिखा है कि प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी की पदोन्नति के लिए यह कोर्स अनिवार्य है। लेवल 3 कोर्स न करने वालों को प्रमोशन देने से मना किया जा सकता है।