शहर के इटौरा मोड़ स्थित जिला कारागार की 22 फुट ऊंची दीवार फांदकर बृहस्पतिवार की शाम तीन बंदी फरार हो गए। शाम 7.30 बजे बंदियों की गिनती के समय इसका पता चला। जानकारी होने पर डीआईजी जेल गोरखपुर रेंज यादुवेंद्र शुक्ल रात में ही जिला जेल पहुंच गए। इस मामले में जेलर आरके दोहरे समेत चार बंदी रक्षक हरेकृष्ण, अंबिका यादव, मनीष सिंह और वीरेंद्र यादव निलंबित कर दिए गए हैं।
जेल में 32 सीसी कैमरे लगे हैं लेकिन उन्हें चालू नहीं किया गया है। इससे कैदियों के गतिविधियों की जानकारी नहीं मिल सकी है। तीनों बंदी 2014 में तरवां स्थित हनुमान मंदिर में तीन लोगों की हत्या के बाद मुकुट, आभूषण आदि लूटने के मामले में बंद थे। डीएम सुहास एलवाई ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश दिया है। वहीं पुलिस अधीक्षक अजय कुमार साहनी ने बदमाशों को गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित की हैं। फरार बंदियों के तार नक्सलियों से भी जुड़े हुए बताए जा रहे हैं।
डीआईजी जेल यादुवेंद्र शुक्ल ने बताया कि फरार तीनों बंदी गाजीपुर जिले के हैं। इनमें मरदह थाना क्षेत्र के महाहर गांव निवासी प्रकाश मुसहर, गहमर थाना क्षेत्र के मनिया गांव निवासी चंद्रशेखर उर्फ शेखर मुसहर और नंदगंज थाना क्षेत्र के अगस्ता गांव निवासी जितेंद्र मुसहर है। तीनों हत्या के मामले में बंद थे। तीनों की ड्यूटी जेल के भंडारे में थी।
बृहस्पतिवार को रक्षाबंधन का दिन होने से जेल स्टाफ मुलाकात करने वालों को लेकर व्यस्त रहा जिसका फायदा उठाते हुए इन तीनों बंदियों ने गैस पाइप लाइन की पाइप को काट कर रख लिया था। शाम छह बजे स्टाफ बंदियों को भोजन बंटवाने में व्यस्त था। इसका फायदा उठाते हुए तीनों ने योजनाबद्ध तरीके से 22 फीट ऊंची दीवार फांद कर भाग गए। बताया जाता है कि बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद नक्सलियों की ओर से एसओ तरवां को धमकी दी गई थी।