जेलों में कैदियों को दिया जाने वाला खाना कितना घटिया होता है। यह बताने के लिए एक आरोपी जेल की रोटी लेकर अदालत पहुंच गया। न्यायाधीश को रोटी दिखाते हुए आरोपी ने कहा कि डॉक्टर ने उसे प्रोटीनयुक्त पोषक युक्त आहार खाने के लिए कहा है। लेकिन, जेल की खराब रोटी खाने से उसे कैसे प्रोटीन मिल सकेगा। इसकी गुणवत्ता कैसी है, आप खुद देख सकते हैं। रोटी की गुणवत्ता देखकर न्यायाधीश का दिल पसीज गया और उसे घर का भोजन खाने की इजाजत मिल गई।
आरोपी कैदी साजिद इलेक्ट्रिकवाला मादक पदार्थ रखने के मामले में ऑर्थर रोड जेल में बंद है। साजिद को आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने साल 2015 में 30 करोड़ के 151 किलो मेफोड्रान के साथ गिरफ्तार किया था। वह मिर्गी व मानसिक बीमारी से पीड़ित है। बीते छह महीने से घर का खाने की मांग कर रहा था, लेकिन, ऑर्थर रोड जेल प्रशासन से उसे घर का खाना खाने की इजाजत नहीं मिल रही थी। आखिरकार, कैदी ने एक तरकीब सोची और जेल की रोटी अदालत में न्यायाधीश को दिखाने का निश्चित किया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक न्यायाधीश ने भी रोटी को देखने के बाद पाया कि बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के लिए जेल की रोटी की गुणवत्ता जिस तरह की होनी चाहिए वैसी नहीं है जबकि डॉक्टर ने उसे पौष्टिक आहार लेने को कहा है।
आखिरकार, न्यायाधीश का दिल पसीजा और उन्होंने जेल में बंद आरोपी साजिद को छह महीने तक घर का भोजन दिए जाने की अनुमति प्रदान कर दी। न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपी को घर का भोजन लेने की रियायत दी गई है लेकिन, छह महीने के बाद डॉक्टर की रिपोर्ट देखकर इसकी समीक्षा की जाएगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा की आरोपी को आगे भी घर का खाना दिया जाए अथवा नहीं।
वहीं, सुनवाई के दौरान जेल प्रशासन की ओर से पैरवी कर रहे सरकारी वकील ने दावा किया कि जेल मैन्युअल के हिसाब से कैदियों को दिया जाने वाला भोजन आरोपी के लिए संतुलित व पर्याप्त है। इसलिए उसे घर से खाना मंगाने की इजाजत न दी जाए।
वकील ने सुरक्षा का भी हवाला दिया और कहा कि यदि आरोपी के घर से खाना मंगाने के आवेदन को स्वीकार किया जाता है तो इससे कैदियों के बीच में गलत संदेश जाएगा। उसके बाद सभी घर से खाना मंगाने की सहूलियत की मांग करेंगे। न्यायाधीश ने जेल प्रशासन की इस दलील को नामंजूर कर दिया और कहा कि जेल अधिकारी जांच के बाद साजिद को घर का खाना खाने की अनुमति दे।