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Law: 'कानून विवादों को सुलझाने के लिए होते हैं, न कि स्वयं विवादित बनने के लिए...' जस्टिस खन्ना ने कही यह बात

Sat, 26 Aug 2023 06:04 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Law: न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने कहा कि कानून, कानूनी विशेषज्ञों के लिए नहीं लिखे जाते हैं और न ही उनके लिए बनाए जाते हैं। यह उनकी अंतर्निहित प्रकृति है कि कानून हर किसी की चिंता करते हैं और हमारे दैनिक जीवन में हर चीज पर लागू होते हैं।
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न्यायमूर्ति संजीव खन्ना (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) जैसे अच्छे कानूनों की विशेषताओं में व्यावहारिकता, निश्चितता और क्रियान्वयन में निरंतरता शामिल है। इसके साथ-साथ समाज में बदलती मांगों को पूरा करने के लिए इनका विकास आवश्यक है। यह बात उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने शनिवार को कही। 

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न्यायमूर्ति खन्ना मौजूदा मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ के बाद मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं। उन्होंने एक पुस्तक विमोचन समारोह में हिस्सा लिया और अपने संबोधन में पिछले कंपनी कानूनों की तुलना में आईबीसी द्वारा दिखाए गए अच्छे नतीजों की वजहों पर प्रकाश डाला। 

हालांकि, तीसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश ने आईबीसी में चेतावनी के संकेतों को चिह्नित किया। उन्होंने कहा कि इन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून वास्तव में विवादों को सुलझाने के लिए होते हैं, न कि स्वयं विवाद बनने के लिए। 
 

उन्होंने आगे कहा कि कानून, कानूनी विशेषज्ञों के लिए नहीं लिखे जाते हैं और न ही उनके लिए बनाए जाते हैं। यह उनकी अंतर्निहित प्रकृति है कि कानून हर किसी की चिंता करते हैं और हमारे दैनिक जीवन में हर चीज पर लागू होते हैं। इस प्रकार उन्हें कभी भी आम लोगों के लिए रहस्य नहीं होना चाहिए। 
 

हालांकि, जब वाणिज्यिक और आर्थिक कानूनों की बात आती थी तो परिदृश्य अलग होता था, क्योंकि उनकी व्याख्या करने के लिए कौशल की आवश्यकता होती थी और उन्हें जटिल माना जाता था। न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि इसका एक कारण यह है कि वाणिज्यिक कानून व्यापक हैं और अनुबंध, बिक्री, कॉर्पोरेट प्रशासन, उपभोक्ता संरक्षण, कर, बैंकिंग और वित्त जैसे कई क्षेत्रों को कवर करते हैं।
 

इसलिए एक व्यापक संहिताकरण (Comprehensive Codification) बनाना मुश्किल था, जो वाणिज्यिक कानून में शामिल सभी पहलुओं को पर्याप्त और सटीक रूप से प्रतिबिंबित करता हो। उन्होंने कहा कि डिफॉल्ट से पहले या जोखिम चरण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) संभावित दिवालियापन के लिए तनाव संकेतों की जांच या मूल्यांकन के लिए एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।
 
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शीर्ष अदालत के न्यायाधीश ने कहा, इसके अलावा ये कानून व्यावसायिक प्रथाओं, विकास और तकनीकी विकास में बदलाव के साथ लगातार विकसित हो रहे हैं। विसंगतियों को ठीक करने और प्रतिस्पर्धी हितों को फिर से संतुलित करने की भी आवश्यकता है।'
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