जिस ताजमहल को ईस्ट इंडिया कंपनी के अफसर नीलाम करना चाहते थे, उसी के दीदार के लिए ब्रिटेन के शाही परिवार की तीसरी पीढ़ी लगातार दीदार के लिए आ रही है। 1961 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय, 1992 में प्रिंसेज डायना और अब 16 अप्रैल को प्रिंस विलियम अपनी पत्नी के साथ ताज के दीदार के लिए आ रहे हैं। आगरा के होटल संचालक सुरेंद्र शर्मा ने ब्रिटिश दूतावास से प्रिंस विलियम से मिलने के लिए वक्त मांगा है, ताकि वह उन्हें उनकी दादी महारानी एलिजाबेथ-द्वितीय के ताजमहल दौरे के फोटो भेंट कर सकें।
1907 लगी थी संगमरमर की चार बेंच
जिस बेंच का नाम ब्रिटेन की राजकुमारी डायना के नाम पर पड़ा, उसे ब्रिटिश हुकूमत के दौरान ही 1907 में लगाया गया था। ब्रिटिश अधिकारियों ने सेंट्रल टैंक पर लगी इंग्लिश वास्तुकला वाली बेंच हटवाकर इनकी जगह चार मुगल डिजायन वाली संगमरमर की बेंच तैयार करवाईं।
महारानी नहीं, राजकुमारी डायना के नाम पर बेंच
ताजमहल पर दुनिया भर की हस्तियों ने फोटो खिंचवाए। शाही परिवार की महारानी एलिजाबेथ ने जनवरी 1961 में पति प्रिंस फिलिप के साथ ताज का दौरा किया, लेकिन जिस बेंच पर उन्होंने फोटो खिंचवाए, उसका नाम उनके नाम से चर्चित नहीं हो सका। शाही परिवार की राजकुमारी डायना जब 1992 में ताज आईं तो उस बेंच का नाम डायना बेंच के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
‘हमने प्रिंस विलियम से मुलाकात करने के लिए दो मिनट का वक्त मांगा है ताकि महारानी एलिजाबेथ के 1961 में ताज दौरे की फोटो एलबम सौंप सकें।’
-सुरेंद्र शर्मा, अध्यक्ष, ब्रज मंडल हेरिटेज कंजरवेशन सोसायटी