राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से जब पूछा गया कि क्या वे कोरोना की वैक्सीन लगवाएंगे तो उन्होंने कहा, 'मेरी उम्र 70 साल से ऊपर है। आपको इसे (कोविड-19 वैक्सीन) उन युवाओं को देनी चाहिए, जिनके पास मेरे उलट जीवन के ज्यादा साल हैं। मेरे पास जीने के लिए केवल 10-15 साल और हैं।'
विपक्षी नेताओं ने वैक्सीन पर जताया था संदेह
कोवैक्सीन को लेकर विपक्ष की तरफ से पहले भी सवाल खड़े किए गए थे। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा था कि लोगों के बीच भरोसा जगाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को पहले वैक्सीन लगवानी चाहिए। इसके अलावा शशि थरूर ने कहा था कि बिना तीसरे चरण के परीक्षण के ही इसे मंजूरी देना खतरनाक है।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि अगर देश के प्रधानमंत्री कोरोना का पहला टीका लगवाते हैं तो इससे देश के नागरिकों में विश्वास पैदा होता है। वहीं सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि ये भाजपा की कोरोना वैक्सीन है, इसे मैं नहीं लगवाउंगा। वैक्सीन पर मुझे भरोसा नहीं है।
एम्स के प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों और अन्य बीमारियों से ग्रस्त 45 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू होने के पहले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीके की पहली खुराक लेने से लोगों के मन में टीके के प्रति किसी भी तरह की हिचक दूर हो जानी चाहिए।
गुलेरिया ने कहा कि पुडुचेरी की रहने वाली सिस्टर पी निवेदा को प्रधानमंत्री को टीका लगाने के ‘हाईप्रोफाइल’ काम के बारे में सुबह ही जानकारी दी गई। गुलेरिया ने कहा, “टीका लगवाने के बाद वह ठीक हैं।”
स्वास्थ्य मंत्री टीका लगवाने की अपील की
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि मैं सभी 60 साल की उम्र से ज्यादा या 45 साल की उम्र से ज्यादा (जिन्हें गंभीर बीमारी है) लोगों से अपील करता हूं कि वो आगे आएं और टीका लगवाएं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सांसदों और विधायकों से भी टीका लगवाने की अपील की।