23 मार्च को जननेता राम मनोहर लोहिया की जयंति होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर एक उनकी याद में एक ब्लॉग लिखा है। यहां आप उनका लिखा पूरा आलेख शब्दशः पढ़ सकते हैंः
आज का दिन देश के महान क्रांतिकारियों के सम्मान का दिन है। मां भारती के अमर सपूतों वीर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हैं। इसके साथ ही अद्वितीय विचारक, क्रांतिकारी तथा अप्रतिम देशभक्त डॉ. राम मनोहर लोहिया को उनकी जयंती पर सादर नमन। प्रखर बुद्धि के धनी डॉ. लोहिया में जन सरोकार की राजनीति के प्रति गहरी आस्था थी।
जब भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था, तब युवा लोहिया ने आंदोलन की कमान संभाली और डटे रहे। उन्होंने भूमिगत रहते हुए अंडरग्राउंड रेडियो सेवा शुरू की, ताकि आंदोलन की गति धीमी न पड़े। गोवा मुक्ति आंदोलन के इतिहास में डॉ. लोहिया का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। जहां कहीं भी गरीबों, शोषितों, वंचितों को मदद की जरूरत पड़ती, वहां डॉ. लोहिया मौजूद होते थे।
डॉ. लोहिया के विचार आज भी हमें प्रेरित करते हैं। उन्होंने कृषि को आधुनिक बनाने तथा अन्नदाताओं के सशक्तीकरण को लेकर काफी कुछ लिखा। उनके इन्हीं विचारों के अनुरूप एनडीए सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि सिंचाई योजना, e-Nam, सॉयल हेल्थ कार्ड और अन्य योजनाओं के माध्यम से किसानों के हित में काम कर रही है।
डॉ. लोहिया समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था और महिलाओं एवं पुरुषों के बीच की असमानता को देखकर बेहद दुखी होते थे।‘सबका साथ, सबका विकास’ का हमारा मंत्र तथा पिछले पांच सालों का हमारा ट्रैक रिकॉर्ड यह दिखाता है कि हमने डॉ. लोहिया के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। अगर आज वे होते तो एनडीए सरकार के कार्यों को देखकर निश्चित रूप से उन्हें गर्व की अनुभूति होती।
जब कभी भी डॉ. लोहिया संसद के भीतर या बाहर बोलते थे, तो कांग्रेस में इसका भय साफ नजर आता था। देश के लिए कांग्रेस कितनी घातक हो चुकी है, इसे डॉ. लोहिया भलीभांति समझते थे। 1962 में उन्होंने कहा था, “कांग्रेस शासन में कृषि हो या उद्योग या फिर सेना, किसी भी क्षेत्र में कोई सुधार नहीं हुआ है।”