दलितों-मुसलमानों के उत्पीड़न की कथित बढ़ती घटनाओं पर हो रही सियासत के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि मुसलमान वोट की मंडी का माल नहीं है। राष्ट्रीय परिषद की बैठक के अंतिम दिन मार्गदर्शन भाषण में प्रधानमंत्री ने राजनीति में आई गिरावट और पार्टी के खिलाफ बनाए जा रहे माहौल का हवाला देते हुए कहा कि हालत यह है कि अब देशभक्ति को भी कोसा जा रहा है।
इसी दौरान उन्होंने जनसंघ के अध्यक्ष रहे दीनदयाल उपाध्याय के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमानों को न पुरस्कृत करें और न ही उन्हें तिरस्कृत करें। उनका परिष्कार करें। उन्हें न वोट की मंडी का माल और न ही घृणा की वस्तु समझें, उन्हें अपना समझें। इससे पहले पीएम मोदी ने दलित उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं के बीच कहा था कि लोग चाहें तो उन्हें गोली मार दें, मगर दलितों का उत्पीड़न न करें।
दीनदयाल जन्म शताब्दी समारोह का उद्घाटन करने के बाद उनके सिद्घांतों, इच्छाओं और चिंताओं को साझा करते हुए पीएम मोदी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को अंत्योदय की सीख दी। उन्होंने कहा कि अन्य दलों की तरह भाजपा का लक्ष्य सत्ता या सिंहासन नहीं है। सत्ता की राजनीति के साथ लेना-देना की राजनीति पार्टी की विचारधारा नहीं है। पार्टी यहां गरीबों की सेवा के लिए जीवन खपाने के लिए है।