प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष पहले किसान सुधारों की बात करता था लेकिन अब कई राजनेता अपनी ही बातों पर यूटर्न ले रहे हैं। शरद पवार जी, और कांग्रेस के लोग, सभी ... सभी सरकारें कृषि सुधारों के लिए खड़ी हुई हैं। वे ऐसा करने में सक्षम थे या नहीं, लेकिन सभी ने वकालत की है कि यह किया जाना चाहिए। अब वे इसका विरोध कर रहे हैं।
अच्छे काम होने दीजिए, गाली देना है तो मेरे खाते में देते रहिए, मोदी है मौका लेते रहिए..
प्रधानमंत्री ने कृषि सुधारों पर कहा कि अच्छे काम होने दीजिए और जो गालियां हैं उन्हें मेरे खाते में आने दीजिए। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ कई टिप्पणियां की, मैं आपके काम आया, ये मैं अपना सौभाग्य मानूंगा, ये आनंद आप लगातार लेते रहिए और मोदी है तो मौका लीजिए।
एमएसपी था, है और भविष्य में भी रहेगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें एक बार देखना चाहिए कि कृषि परिवर्तन से बदलाव होता है कि नहीं। कोई कमी हो तो उसे ठीक करेंगे, कोई ढिलाई हो तो उसे कसेंगे। मैं विश्वास दिलाता हूं कि मंडियां और अधिक आधुनिक बनेंगी। एमएसपी था। एमएसपी है। भविष्य में भी एमएसपी बना रहेगा।
देश को प्रत्येक सिख पर गर्व है
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को सिखों के योगदान पर बहुत गर्व है। यह एक ऐसा समुदाय है जिसने राष्ट्र के लिए बहुत कुछ किया है। गुरु साहिबों के वचन और आशीर्वाद अनमोल हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पंजाब के साथ क्या हुआ। इसे विभाजन के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। यह 1984 के दंगों के दौरान सबसे ज्यादा रोया था। वे सबसे दर्दनाक घटनाओं के शिकार हुए। जम्मू-कश्मीर में मासूमों की हत्या कर दी गई।
मनमोहन सिंह के बयान को दोहराया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 1930 के दशक में पूरे विपणन शासन व्यवस्था में कुछ जटिलाएं हैं, जिन्हें हमें खत्म करना है, जो भारत को एक बड़े बाजार के तौर पर सामने आने में दिक्कत खड़े करते हैं। मनमोहन सिंह ने किसानों को मुफ्त बाजार देने और भारत को एक बड़ा आम बाजार बनाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि हम वही कर रहे हैं जो मनमोहन सिंह जी ने कहा था। इसपर गर्व कीजिए।
किसान आंदोलन क्यों हो रहा है ये किसी ने नहीं बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सदन में किसान आंदोलन की भरपूर चर्चा हुई है। ज्यादा से ज्यादा समय जो बातें बताईं वो आंदोलन के संबंध में बताईं। किस बात को लेकर आंदोलन है उस पर सब मौन रहे। जो मूलभूत बात है, अच्छा होता कि उस पर भी चर्चा होती।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र को लेकर यहां काफी उपदेश दिए गए हैं। लेकिन मैं नहीं मानता कि जो बातें यहां बताई गईं हैं, उसमें देश का कोई भी नागरिक भरोसा करेगा। भारत का लोकतंत्र ऐसा नहीं है कि जिसकी खाल हम इस तरह से उधेड़ सकते हैं। भारत लोकतंत्र की जननी है, भारत का प्रशासन लोकतांत्रिक है, इसकी परंपरा, संस्कृति, विरासत, और इच्छाशक्ति लोकतांत्रिक है, जो हमें एक लोकतांत्रिक देश बनाता है। ये सत्यम, शिवम, सुंदरम के मूल्यों से प्रेरित है।
पूरा विश्व अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है
प्रधानमंत्री ने कहा कि शायद ही किसी ने सोचा होगा कि मानव जाति को ऐसे कठिन दौर से गुजरना होगा, अनेक चुनौतियों के बीच राष्ट्रपति जी का इस दशक का पहला भाषण हुआ। कोरोना की लड़ाई जीतने का यश किसी सरकार को नहीं जाता है, किसी व्यक्ति को नहीं जाता है लेकिन हिंदुस्तान को जाता है।