‘मन की बात’ कार्यक्रम में आए लोगों के पत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे जब भी कोई पत्र पढ़ते हैं तो पत्र लिखने वाले की परिस्थिति, उनके भाव.. विचार का हिस्सा बन जाते हैं। वह पत्र सिर्फ एक कागज़ का टुकड़ा नहीं रहता। मोदी ने कहा कि कि उन्होंने करीब 40-45 साल अखंड रूप से एक परिव्राजक का जीवन जिया, देश के अधिकतर जिलों में गये और दूर-दराज के इलाकों में बहुत समय भी बिताया है। यही वजह है कि जब वे पत्र पढ़ते हैं तो वे उस स्थान और सन्दर्भ से खुद को आसानी से जोड़ लेते हैं।
मीडिया का शुक्रिया अदा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह आकाशवाणी, एफ़.एम. रेडियो, दूरदर्शन, अन्य टीवी चैनल, सोशल मीडिया को भी धन्यवाद देना चाहते हैं जिन्होंने स्वच्छता, सड़क सुरक्षा, मादक पदार्थ मुक्त भारत, सेल्फी विद डॉटर जैसे कई विषयों को नवोन्मेषी तरीके से एक अभियान का रूप देकर आगे बढ़ाया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मन की बात’ ने लोगों की बातों को एक सूत्र में पिरोकर कर हल्की-फुल्की बातें करते-करते 50 एपिसोड का सफ़र तय कर लिया। हाल ही में आकाशवाणी द्वारा ‘मन की बात’ पर किए गए सर्वे में यह बात सामने आई कि औसतन 70 प्रतिशत लोग नियमित ‘मन की बात’ सुनते हैं। अधिकतर लोगों को लगता है कि ‘मन की बात’ का सबसे बड़ा योगदान ये है कि इससे समाज में सकारात्मकता की भावना बढ़ी है।
अंत में पीएम मोदी ने कहा कि मेरे प्यारे देशवासियो, 50 एपिसोड के बाद हम फिर एक बार मिलेंगे अगले ‘मन की बात’ में। मुझे विश्वास है कि आज ‘मन की बात’ के इस कार्यक्रम के पीछे की भावनाओं को मुझे पहली बार आपके समक्ष कहने का मौका मिला क्योंकि आप लोगों ने ऐसे ही सवाल पूछे लेकिन हमारी यात्रा जारी रहेगी। आपका साथ जितना ज्यादा जुड़ेगा, उतनी यात्रा हमारी और गहरी होगी और हर किसी को संतोष देनेवाली मिलेगी।