प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में 100 मिनट के लंबे भाषण के बाद राज्यसभा में दिए अपने भाषण में भी विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने विपक्ष को चुप कराने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री तक का जिक्र किया।
जवाहर लाल नेहरू का नाम लेकर कांग्रेस पर हमला
कांग्रेस पर हमला करते हुए पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा कि देश ने देख लिया है कि दल के लिए कौन है और देश के लिए कौन है। जब बात निकली है तो दूर तलक जानी चाहिए। किसी को प्रधानमंत्री बनना था, इसलिए हिंदुस्तान में लकीर खींची गई और हिंदुस्तान का बंटवारा कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि पांच नवंबर 1950 को इसी संसद में नेहरू जी ने कहा था कि इसमें कोई संदेह नहीं हैं कि जो प्रभावित लोग भारत में बसने के लिए आए हैं, ये नागरिकता मिलने के अधिकारी हैं और अगर इसके लिए कानून अनुकूल नहीं हैं तो कानून में बदलाव किया जाना चाहिए।
लाल बहादुर शास्त्री का बयान दिलाया याद
पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का बयान याद दिलाते हुए राज्यसभा में कहा कि जहां तक ईस्ट पाकिस्तान का ताल्लुक है, उसका ये फैसला मालूम होता है कि वहां से मुस्लिम जीतने हैं , सब निकाल दिए जाएं, वह एक इस्लामिक स्टेट है, एक इस्लामिक स्टेट के नाते वह यह सोचता है कि यहां केवल इस्लाम को मानने वाले ही रह सकते हैं। गैर इस्लामिक लोग नहीं रह सकते। लिहाजा हिंदू निकाले जा रहे हैं, ईसाई निकाले जा रहे हैं, मैं समझता हूं कि 37 हजार से ऊपर ईसाई आज वहां से भारत आ गए हैं। बौद्ध धर्म मानने वाले भी वहां से निकाले जा रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि ये बयान पूर्व पीएम शास्त्री ने 3 अप्रैल 1964 को दिया था। पंडित जवाहर लाल नेहरू तब प्रधानमंत्री थे।
राज्यसभा में पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें
- एनपीआर और जनगणना सरकार की सामान्य प्रक्रियाएं हैं, जिन्हें पहले भी अंजाम दिया गया है। लेकिन जब वोटबैंक की राजनीति एक आवश्यकता है, तो जो लोग पहले एनपीआर को अंजाम देते थे, अब इसके बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं।
- इस दशक में दुनिया की भारत से बहुत अपेक्षाएं हैं और भारतीयों को हमसे बहुत अपेक्षाएं हैं। इन अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए हम सभी के प्रयास 130 करोड़ भारतवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप होने चाहिए।
- क्योंकि आप विपक्ष में हैं तो आपके ही द्वारा किया गया एनपीआर अब आपको बुरा लगने लगा है।
- 2003 में लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल प्रस्तुत किया गया। नागरिकता संशोधन बिल 2003 पर जिस संसद की स्थायी समिति ने चर्चा की और फिर उसे आगे बढ़ाया, उस कमेटी में कांग्रेस के अनेक सदस्य आज भी यहां बैठे हैं।
- कई विपक्षी सदस्य इन दिनों बहुत उत्साहित हैं, जो लोग चुप थे वे हिंसक हो गए हैं।
- क्या राष्ट्र को गुमराह करना और गलत जानकारी देना ठीक है? क्या कोई भी एक अभियान का हिस्सा हो सकता? कई विपक्षी दलों द्वारा सीएए का समर्थन दुर्भाग्यपूर्ण है।
- सदन में सीएए पर चर्चा हुई है। यहां बार-बार ये बताने की कोशिश की गई कि अनेक हिस्सों में प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाई गई, जो हिंसा हुई, उसी को आंदोलन का अधिकार मान लिया गया।
- हमारे आदिवासी बच्चों में कई होनहार बच्चे होतें हैं, लेकिन अवसर नहीं होता है। हमने एकलव्य स्कूलों के द्वारा ऐसे बच्चों को अवसर देने का बहुत बड़ा काम किया है।
- हमने मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं के समाधान को 100 फीसदी पूरा करने की दिशा में जाने का प्रयास किया है।
- सभी घरों तक साफ पानी पहुंचाना हमारा मिशन है।
- आज छोटे स्थानों पर डिजिटल ट्रांजैक्शन सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में भी टियर-2, टियर-3 शहर आगे बढ़ रहे हैं।
- जीएसटी को लेकर अगर इतना ही ज्ञान आपके पास था तो इसे लटकाए क्यों रखा था।
- भारत को भारत की नजर से टूरिज्म को डेवलप करना चाहिए, पश्चिम की नजर से नहीं।
- निराशा देश का भला कभी नहीं करती, इसलिए 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी की बात का सुखद परिणाम यह हुआ कि जो विरोध करते हैं, उन्हें भी 5 ट्रिलियन डॉलर की बात करनी पड़ती है। मानसिकता तो बदली है हमने।
- यहां अर्थव्यवस्था के विषय में चर्चा हुई। देश में निराश होने का कोई कारण नहीं है। अर्थव्यवस्था के जो बेसिक मानदंड हैं, उनमें आज भी देश की अर्थव्यवस्था सशक्त है, मजबूत है और आगे जाने की ताकत रखती है।
- 5 अगस्त 2019 का दिन आतंक और अलगाव को बढ़ावा देने वालों के लिए ब्लैक डे सिद्ध हो चुका है।
- अब जम्मू-कश्मीर में पीएम पैकेज समेत अन्य कई योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
- जम्मू-कश्मीर में पीएम आवास योजना के तहत मार्च 2018 तक सिर्फ 3.5 हजार मकान बने थे। 2 साल से भी कम समय में इसी योजना के तहत 24 हजार से ज्यादा मकान बने हैं।
- सिर्फ 18 महीनों में जम्मू-कश्मीर में डेढ़ लाख बुजुर्गों और दिव्यांगों को पेंशन योजना से जोड़ा गया है।
- 18 महीनों में जम्मू-कश्मीर में 2.5 लाख शौचालयों का निर्माण हुआ, 3 लाख 30 हजार घरों में बिजली का कनेक्शन दिया गया। 3.5 लाख से ज्यादा लोगों को आयुष्मान योजना के गोल्ड कार्ड दिए जा चुके हैं।
- गवर्नर रूल के बाद 18 महीनों में जम्मू-कश्मीर में 4400 से अधिक सरपंचों और 35 हजार से ज्यादा पंचों के लिए शांतिपूर्ण चुनाव हुआ।
- पहली बार जम्मू-कश्मीर में एंटी करप्शन ब्यूरो की स्थापना हुई, पहली बार वहां अलगाववादियों के सत्कार की परंपरा समाप्त हो गई। पहली बार जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ पुलिस और सेना मिलकर निर्णायक कार्रवाई कर रहे हैं।
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर फैसला लंबी चर्चा के बाद हुआ। वहां 4500 सरपंचों और 35 हजार पंचों के लिए शांतिपूर्ण मतदान हुआ। 18 महीने में जम्मू कश्मीर में ढाई लाख शौचालयों का निर्माण हुआ।
- 18 महीने में जम्मू कश्मीर में साढ़े तीन लाख से आयुष्मान भारत योजना के गोल्ड कार्ड दिए जा चुके हैं। वहां डेढ़ लाख बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग जनों को सरकार की पेंशन स्कीम से जोड़ा गया।
- पुराने कारनामे इतनी जल्दी भूलते नहीं हैं। एक समय था जब दरवाजे बंद कर दिए गए थे। टीवी का चैनल बंद कर दिया गया था। आपको एक नया राज्य बनाने का अवसर मिला। उमंग उत्साह के साथ आप आगे बढ़ सकते थे। तेलंगाना के गठन के समय संसद के दरवाजे बंद कर दिए गए थे।
- गुलाम नबी आजाद जी ने कहा कि जम्मू कश्मीर का फैसला सदन में बिना चर्चा के हुआ। देश ने टीवी पर दिनभर चर्चा देखी है, सुनी है। देश ने देखा है कि व्यापक चर्चा हुई और विस्तार से चर्चा के बाद निर्णय किए गए हैं। सदन ने निर्णय किया। सम्मानीय सदस्यों ने अपना वोट देखकर निर्णय किया है।
ये नया भारत आगे बढ़ चला है।
ये कर्तव्य पथ पर चल पड़ा है।
और कर्तव्य में ही सारे अधिकारों का सार है, ये खुद गांधी जी कह गए हैं।
आइए, हम गांधी जी के बताए कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते हुए, एक समृद्ध, समर्थ और संकल्पित नए भारत के निर्माण में जुट जाएं।