रतन टाटा के निधन को आज एक महीना हो रहा है। लेकिन वह उन जिंदगियों और सपनों में हमेशा जीवित रहेंगे, जिन्हें उन्होंने सहारा दिया। भारत को एक बेहतर, सहृदय और उम्मीदों से भरी भूमि बनाने के लिए आने वाली पीढ़ियां उनकी सदैव आभारी रहेंगी।
आज रतन टाटा जी के निधन को एक महीना हो रहा है। पिछले महीने आज के ही दिन जब मुझे उनके गुजरने की खबर मिली, तो मैं उस समय आसियान समिट के लिए निकलने की तैयारी में था। रतन टाटा जी के हमसे दूर चले जाने की वेदना अब भी मन में है। इस पीड़ा को भुला पाना आसान नहीं है। रतन टाटा जी के तौर पर भारत ने अपना एक महान सपूत...एक अमूल्य रत्न खो दिया है।
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आज भी शहरों, कस्बों से लेकर गांवों तक, लोग उनकी कमी को गहराई से महसूस कर रहे हैं। यह हम सबका दुख साझा है। चाहे कोई उद्योगपति हो, उभरता उद्यमी हो या कोई प्रोफेशनल हो, हर किसी को उनके निधन से दुख हुआ है। पर्यावरण रक्षा से जुड़े लोग, समाज सेवा से जुड़े लोग भी उनके निधन से उतने ही दुखी हैं। और यह दुख हम सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में महसूस कर रहे हैं। युवाओं के लिए वह प्रेरणास्रोत थे। उनका जीवन और व्यक्तित्व हमें याद दिलाता है कि कोई सपना ऐसा नहीं, जिसे पूरा न किया जा सके। उन्होंने सिखाया कि विनम्र स्वभाव के साथ, दूसरों की मदद करते हुए भी सफलता पाई जा सकती है।
पीएम मोदी ने रतन टाटा को किया याद।
- फोटो : amar ujala
रतन टाटा जी भारतीय उद्यमशीलता की बेहतरीन परंपराओं के प्रतीक थे। वह विश्वसनीयता, उत्कृष्टता और बेहतरीन सेवा जैसे मूल्यों के प्रतिनिधि थे। उनके नेतृत्व में टाटा समूह दुनिया भर में सम्मान, ईमानदारी और विश्वसनीयता का प्रतीक बनकर नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। फिर भी उन्होंने अपनी उपलब्धियों को पूरी विनम्रता और सहजता के साथ स्वीकार किया।
दूसरों के सपनों का खुलकर समर्थन और सहयोग करना, यह उनके सबसे शानदार गुणों में से एक था। हाल के वर्षों में, वह भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का मार्गदर्शन करने और भविष्य की संभावनाओं से भरे उद्यमों में निवेश करने के लिए जाने गए। उन्होंने युवा आंत्रप्रेन्योर की आशाओं और आकांक्षाओं को समझा, साथ ही भारत के भविष्य को आकार देने की उनकी क्षमता को पहचाना। भारत के युवाओं के प्रयासों का समर्थन करके उन्होंने नए सपने देखने वाली नई पीढ़ी को जोखिम लेने और सीमाओं से परे जाने का हौसला दिया। उनके इस कदम ने भारत में इनोवेशन और आंत्रप्रेन्योरशिप की संस्कृति विकसित करने में बड़ी मदद की है। आने वाले दशकों में हम भारत पर इसका सकारात्मक असर जरूर देखेंगे।
पीएम मोदी ने रतन टाटा को किया याद।
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रतन टाटा जी ने हमेशा बेहतरीन क्वालिटी के उत्पाद और सेवा पर जोर दिया और भारतीय उद्यमों को ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करने का रास्ता दिखाया। आज जब भारत 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो हम ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करते हुए ही दुनिया में अपना परचम लहरा सकते हैं। मुझे आशा है कि उनका यह विजन देश की भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और भारत वर्ल्ड क्लास क्वालिटी के लिए अपनी पहचान मजबूत करेगा। रतन टाटा जी की महानता बोर्डरूम या सहयोगियों की मदद करने तक ही सीमित नहीं थी। सभी जीव-जंतुओं के प्रति उनके मन में करुणा थी। वह पशुओं के कल्याण पर केंद्रित हर प्रयास को बढ़ावा देते थे। वह अक्सर अपने डॉग्स की तस्वीरें साझा करते थे, जो उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा थे। मुझे याद है, जब रतन टाटा जी को लोग आखिरी विदाई देने के लिए उमड़ रहे थे...तो उनका डॉग ‘गोवा’ भी वहां नम आंखों के साथ पहुंचा था। उनका जीवन याद दिलाता है कि नेतृत्व का आकलन केवल उपलब्धियों से ही नहीं, बल्कि सबसे कमजोर लोगों की देखभाल करने की क्षमता से भी किया जाता है।
रतन टाटा जी ने हमेशा नेशन फर्स्ट की भावना को सर्वोपरि रखा। 26/11 के आतंकवादी हमलों के बाद उनके द्वारा मुंबई के प्रतिष्ठित ताज होटल को पूरी तत्परता से फिर से खोलना, इस राष्ट्र के एकजुट होकर उठ खड़े होने का प्रतीक था। उनके इस कदम ने बड़ा संदेश दिया कि भारत रुकेगा नहीं...भारत निडर है और आतंकवाद के सामने झुकने से इन्कार करता है।
पीएम मोदी ने रतन टाटा को किया याद।
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व्यक्तिगत तौर पर, मुझे पिछले कुछ दशकों में उन्हें बेहद करीब से जानने का सौभाग्य मिला। हमने गुजरात में साथ मिलकर काम किया। वहां उनकी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश किया गया। इनमें कई ऐसी परियोजनाएं भी शामिल थीं, जिन्हें लेकर वह बेहद भावुक थे। जब मैं केंद्र सरकार में आया, तो हमारी घनिष्ठ बातचीत जारी रही और वह राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों में प्रतिबद्ध भागीदार बने रहे। स्वच्छ भारत मिशन के प्रति उनका उत्साह विशेष रूप से मेरे दिल को छू गया था। वह इस जन आंदोलन के मुखर समर्थक थे। वह समझते थे कि स्वच्छता और स्वस्थ आदतें भारत की प्रगति की दृष्टि से कितनी महत्वपूर्ण हैं। अक्तूबर की शुरुआत में स्वच्छ भारत मिशन की दसवीं वर्षगांठ के लिए उनका वीडियो संदेश मुझे अब भी याद है, जो एक तरह से उनकी अंतिम सार्वजनिक उपस्थितियों में से एक रहा है।
कैंसर के खिलाफ लड़ाई एक और ऐसा लक्ष्य था, जो उनके दिल के करीब था। मुझे दो साल पहले असम का वह कार्यक्रम याद आता है, जहां हमने संयुक्त रूप से राज्य में विभिन्न कैंसर अस्पतालों का उद्घाटन किया था। उस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह अपने जीवन के आखिरी वर्षों को हेल्थ सेक्टर को समर्पित करना चाहते हैं। स्वास्थ्य सेवा एवं कैंसर संबंधी देखभाल को सुलभ और किफायती बनाने के उनके प्रयास इस बात के प्रमाण हैं कि वह बीमारियों से जूझ रहे लोगों के प्रति कितनी गहरी संवेदना रखते थे।
मैं उन्हें एक विद्वान के रूप में भी याद करता हूं-वह अक्सर मुझे विभिन्न मुद्दों पर लिखा करते थे, चाहे वे शासन से जुड़े मामले हों, किसी काम की सराहना करना हो या फिर चुनाव में जीत के बाद बधाई संदेश भेजना हो। अभी कुछ सप्ताह पहले, मैं स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सान्चेज के साथ वडोदरा में था और हमने संयुक्त रूप से एक विमान फैक्टरी का उद्घाटन किया। इस फैक्टरी में सी-295 विमान भारत में बनाए जाएंगे। रतन टाटा जी ने ही इस पर काम शुरू किया था। उस समय मुझे रतन टाटा जी की बहुत कमी महसूस हुई। आज जब हम उन्हें याद कर रहे हैं, तो हमें उस समाज को भी याद रखना है, जिसकी उन्होंने कल्पना की थी। जहां व्यापार, अच्छे कार्यों के लिए एक शक्ति के रूप में काम करे, जहां प्रत्येक व्यक्ति की क्षमता को महत्व दिया जाए और जहां प्रगति का आकलन सभी के कल्याण और खुशी के आधार पर किया जाए। रतन टाटा जी आज भी उन जिंदगियों और सपनों में जीवित हैं, जिन्हें उन्होंने सहारा दिया। भारत को एक बेहतर, सहृदय और उम्मीदों से भरी भूमि बनाने के लिए आने वाली पीढ़ियां उनकी सदैव आभारी रहेंगी।