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प्रधानमंत्री मोदी का फोन बताता है कि कितने अहम हैं चंद्रबाबू नायडू

शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Fri, 09 Mar 2018 02:28 AM IST
चंद्रबाबू नायडू
चंद्रबाबू नायडू दक्षिण भारत की राजनीति में अहम स्थान रखते हैं। खासकर अभी कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होना है। केरल में राजनीतिक घमासान चल रहा है और अगले साल लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित है। मौजूदा राजनीतिक हालात में चंद्रबाबू नायडू की अहमियत बताने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उन्हें किया गया फोन ही काफी है। सूत्र बताते हैं कि एनडीए में साथ रहने के सारे रास्ते बंद होता देखकर प्रधानमंत्री ने उन्हें मनाने के लिए फोन किया।

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से बात की। हालांकि बात नहीं बनी। इसके बाद टीडीपी कोटे के दोनों मंत्री प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे और उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया। इससे पहले राहुल गांधी ने जंतर मंतर पर जाकर आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का समर्थन किया था। राहुल गांधी के वहां जाने के बाद भाजपा के नेताओं के कान खड़े हो गए थे।

कांग्रेस अध्यक्ष ने आंध्र प्रदेश के साथ अन्याय को स्वीकारते हुए वादा किया कि 2019 में यदि कांग्रेस की सरकार सत्ता में आएगी तो इस मांग को पूरा करेगी। कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री द्वारा फोन किए जाने के पीछे इस कारण को भी अहम मान रहे हैं। हालांकि कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यह केन्द्र सरकार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के बीच में चल रही है नूरा कुश्ती है। 

बुधवार 7 मार्च से बढ़ी सरगर्मी

बुधवार को वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आंध्र प्रदेश सरकार और टीडीपी के सांसदों की राज्य को विशेष दर्जा देने की मांग पर विचार करके निर्णय लिया था। निर्णय में अरुण जेटली ने विशेष दर्जा जैसी स्थिति से बचते हुए विशेष पैकेज देने की घोषणा की, लेकिन टीडीपी के प्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू इतने भर से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने बुधवार सात मार्च को एनडीए से हटने का संकेत देते हुए केन्द्र सरकार से अपने मंत्रियों को इस्तीफा देने की घोषणा की।

सूत्र बताते हैं कि नायडू को मनाने के लिए प्रधानमंत्री ने खुद उनसे फोन पर बात की। दोनों नेताओं के बीच में करीब 20 मिनट तक फोन पर चर्चा हुई और इसके बाद गुरुवार 8 मार्च को टीडीपी के दोनों मंत्रियों (अशोक गजपति राजू और वाई एस चौधरी) ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।

हालांकि टीडीपी कोटे से कैबिनेट मंत्री अशोक गजपति राजू ने साफ किया कि यह केन्द्र सरकार के केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा है। अभी उनकी पार्टी एनडीए का हिस्सा है। राजू के अनुसार ताजा स्थिति का हल निकालने की भी कोशिश हो रही है। अभी उनकी पार्टी एनडीए से अलग नहीं हुई है। अभी सौहार्दपूर्ण रिश्ते हैं। 
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क्या अलग होगी चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी?

यह एक बड़ा सवाल है? इसका उत्तर अभी कोई नहीं दे पा रहा है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि यह नूरा-कुश्ती है। भाजपा चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी से अलग होकर राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहेगी। वहीं चंद्रबाबू नायडू भी ऐसा केवल राजनीतिक मजबूरियों के चलते कर रहे हैं। हालांकि कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि चंद्रबाबू नायडू के लिए फिलहाल आंध्र प्रदेश सबसे अहम है।

अशोक गजपति राजू के बयान से भी लग रहा है कि अभी तमाम राजनीतिक गुंजाइश बची है। आंध्र प्रदेश की राजनीति को समझने वालों के अनुसार वाईएसआर कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी राज्य में व्यापक दौरा कर रहे हैं।

दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्ज न मिलने से राज्य का विकास प्रभावित हुआ है और चंद्र बाबू नायडू की सरकार को लेकर लोगों की नाराजगी बढ़ रही है। इसलिए अभी राजनीति के तमाम विकल्प अपनाए जा रहे हैं।

टीडीपी बनाम एनडीए हुआ तो?

टीडीपी के एनडीए से अलग होने के बाद इसका सबसे बड़ा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है। कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होना है। कर्नाटक की सीमा आंध्र प्रदेश से लगती है और वहां की कुछ दर्जन विधानसभा सीटों को प्रभावित करती है।

एनडीए से अलग होने के बाद टीडीपी अपनी राजनीतिक धमक बनाए रखने के लिए कांग्रेस और भाजपा से अलग तीसरे मोर्चे को हवा दे सकती है। टीडीपी पहले भी इसी रणनीति पर चली थी। इससे भी भाजपा को 2019 के चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस के नेता ऑफ दि रिकार्ड मानते हैं कि आंध्र प्रदेश में उनकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।

कांग्रेस से अच्छी स्थिति कांग्रेस (वाईएसआर-जगन मोहन रेड्डी) की है। रेड्डी के साथ कांग्रेस के रिश्ते अभी भी ठीक नहीं हो पाए हैं। इसलिए उसे कोई बड़ा नुकसान नहीं होने वाला है। हां, इसके बरअक्स टीडीपी से राज्य के जनता की नाराजगी कम हो सकती है। 

क्या है चंद्र बाबू की मांग

नायडू चाहते हैं कि केन्द्र विशेष राज्य के दर्जे का अपना वादा निभाए। बजट में इसके प्रावधान किए जाएं। प्रधानमंत्री विधानसभा की 175 सीटों की बजाय इसे 225 करने के लिए तत्काल कदम उठाएं। केन्द्र सरकार राज्य सरकार की पोलारवरम परियोजना के लिए 58 हजार करोड़ रुपये की तत्काल मंजूरी दे।

क्या है आंध्र प्रदेश में हैसियत

क्या है आंध्र प्रदेश में हैसियत

2014 के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में टीडीपी भाजपा ने परचम लहराया था। 175 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने जहां चार सीटें जीती थी, वहीं टीडीपी  102 सीटों पर सफल रही थी। इसके बरअक्स वाइएसआर कांग्रेस को 67 सीटें मिली थी। राज्य में सबसे घाटे में कांग्रेस पार्टी रही थी। एक तरह से जगन मोहन रेड्डी और कांग्रेस पार्टी की लड़ाई में कांग्रेस का जनाधार ही खत्म सा हो गया था।

टीडीपी के कुल 15 सांसद लोकसभा में पहुंचे और उनमें अशोक गजपति राजू और वाइएस चौधरी को कैबिनेट में जगह मिली थी। इन दोनों मंत्रियों ने गुरुवार को प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि अभी यह मंजूर नहीं हुआ है।

कांग्रेस का दर्द

कांग्रेस के रणनीतिकारों को चंद्रबाबू नायडू और केन्द्र सरकार के बीच जारी तनातनी बहुत सता रही है। इसके चलते पंजाब नेशनल बैंक से धोखाधड़ी करके भागने वाले नीरव मोदी, मेहुल चोकसी के मुद्दे को वह अपेक्षा के मुताबिक धार नहीं दे पा रही है। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि इस धोखाधड़ी के मुद्दे से भटकाने के लिए तमाम राजनीतिक दांव-पेंच चल रहे हैं।

सूत्र का कहना है कि कांग्रेस ने पंजाब नेशनल बैंक के साथ धोखाधड़ी करने वाले मेहुल चोकसी और नीरव मोदी के मामले में केन्द्र सरकार को जमकर घेरने की भूमिका तैयार किया था, लेकिन इसी बीच 24 फरवरी को दुबई में फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी की दुर्घटनावश मृत्यु हो गई। इसके बाद संसद में विपक्ष ने मुद्दा उठाना शुरू किया तो केन्द्र सरकार ध्यान भटकाने के नये रास्ते निकाल रही है।
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