पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त गौतम बंबावाले ने भारत-पाक रिश्ते में कूटनीतिक तरंग पैदा कर दी है। गौतम बंबावाले ने जी-20 शिखर सम्मेलन के समाप्त होने के बाद चौंकाया है। उन्होंने कराची में एक सवाल के जवाब में कहा कि मैं भविष्य के बारे में नहीं बता सकता, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेन्द्री मोदी नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मेलन में हिस्सा लेने को लेकर आशान्वित हैं।
उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकी हमले के बाद से अभी तक भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों के कई मोड़ आए, लेकिन उच्च स्तर पर संवाद और कूटनीतिक प्रक्रिया लगातार चल रही है। प्रधानमंत्री मोदी सार्क शिखर सम्मेलन के लगातार पक्षधर रहे हैं और वह इस फोरम को ठोस आकार देना चाहते हैं।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान को किनारे रखकर अन्य देशों के साथ सहयोग का वैकल्पिक फोरम तैयार करने के भी सुझाव आए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव एस जयशंकर अभी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
मोदी का दौरा क्यों?
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पीएम मोदी के सार्क दौरे के कई कारण हैं
- सार्क के चार्टर के अनुसार दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग शिखर सम्मेलन तभी संभव है जब इसमें शामिल सातो देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे।
- सार्क शिखर सम्मेलन-2016 को संपन्न कराने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है और जब यह सम्मेलन नहीं हो जाता, यह जिम्मेदारी पाकिस्तान के पास ही रहेगी। इसके बाद अगला सार्क सम्मेलन भारत में होगा।
- प्रधानमंत्री भारत के कारण सार्क शिखर सम्मेलन के खटाई में पडऩे की तोहमत नहीं लगने देना चाहते।
- प्रधानमंत्री बनना सुनिश्चित होने के बाद से प्रधानमंत्री का पड़ोसी देशों के सहयोग पर खासा जोर रहा है। उनके शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ समेत सार्क के सभी सदस्य देश आए थे। प्रधानमंत्री ने पहला विदेश दौरा भी सार्क देश में ही किया था और चाहे नेपाल को भूकंप के बाद मानवीय सहायता देने का प्रकरण हो या अन्य उन्होंने सार्क देशों के साथ संबंध शीर्ष वरीयता पर रखा है।
- उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि तमाम तनाव के बाद भी पाकिस्तान के साथ उच्च स्तर पर लगातार संवाद कायम है। कूटनीतिक पहल चल रही है। भारत हमेशा पाकिस्तान के साथ शांति, सौहार्द और सहयोगपूर्ण संबंधों का पक्षधर है।
इस मामले में पूर्व विदेश सचिव, सलमान हैदर ने कहा, 'भारत और पाकिस्तान के इस समय रिश्ते काफी तनावपूर्ण है। दोनों तरफ से बयानबाजी का दौर जारी है। ऐसे भारतीय उच्चायुक्त का बयान जरूर चौंकाने वाली आशा की किरण जैसा है। प्रधानमंत्री मोदी यदि इस्लामाबाद जाएंगे तो उससे पहले उन्हें बताना होगा वह क्यों जा रहे हैं, क्योंकि वहां जाने के बाद प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ द्विपक्षीय वार्ता का दबाव बढ़ेगा। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी को पाकिस्तान के प्रति सीमापार की घुसपैठ और आतंकवाद को लेकर नाराजगी स्पष्ट करनी होगी। कदाचित प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान न जाने का मन बनाया तो उन्हें यह भी बताना होगा कि क्यों नहीं गए। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान न जाकर और सार्क शिखर सम्मेलन इस बार न होने देने की तोहमत अपने सिर पर नहीं लेना चाहेंगे।'