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दूरसंचार, रेलवे और बैंकिंग सेवाओं की सबसे ज्यादा शिकायतें, 2017 में मिलीं 16 लाख कंप्लेन

Tue, 17 Jul 2018 02:18 AM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली
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प्रधानमंत्री मोदी का डिजिटल इंडिया अभियान लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। ये हम नहीं बल्कि प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग से जारी रिपोर्ट कह रही है। जब से लोगों ने मोबाइल फोन पर बैंकिंग, रेलवे टिकट बुकिंग जैसी सेवाओं का उपयोग करना शुरू किया है, शिकायतों का अंबार लग गया है। विभाग की सूची में सबसे ज्यादा शिकायतें दूरसंचार, रेलवे और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी हुई हैं। 

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हाल ही में क्वॉलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने सरकार के टॉप 20 मंत्रालयों में आने वाली शिकायतों के विश्लेषण पर एक सर्वे किया। इस सर्वे को मकसद था कि शिकायतों को कम करने के लिए उनका विश्लेषण करके एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाए।  

क्वॉलिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के सर्वे के आधार पर प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने रिपोर्ट जारी की है। सर्वे के मुताबिक 2017 में विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों से संबंधित मुद्दों पर 16 लाख से अधिक सार्वजनिक शिकायतें प्राप्त हुईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि बैंकिंग देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक प्रमुख हिस्सा है, इसलिए इस सेक्टर में बड़ी संख्या में शिकायतों का आना लाजिमी है। 
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टॉप पर दूरसंचार सेवाएं

रिपोर्ट में बताया गया है कि दूरसंचार विभाग में 2016 से लेकर 30 जून 17 में 35108 शिकायतें मिलीं, वहीं साल 2012 से 15 तक 161,014 शिकायतें मिलीं। इनमें से 40 फीसदी शिकायतें लेंडलाइन और ब्रॉडबैंड सर्विसेज से जुड़ी हुई थीं। ब्रॉडबैंड सर्विसेज में सबसे ज्यादा शिकायतें उसकी स्पीड को लेकर थीं, लोगों की शिकायत थी कि उन्हें वह स्पीड नहीं मिल रही है जैसा वायदा किया गया था। वहीं 31 फीसदी शिकायतें अधिकारियों के ढुलमुल रवैये, 19 फीसदी नेटवर्क कॉल ड्रॉप और 5 फीसदी गलत बिल भेजने को लेकर थीं। 

रेलवे मंत्रालय

रेलवे मंत्रालय में 29 हजार शिकायतें ग्राहकों ने दर्ज कराईं, जबकि साल 2012-15 तक 76,776 शिकायतें मिलीं। इनमें से 45 फीसदी शिकायतें रिफंड में 2 से 4 माह की वक्त और रिफंड दावों की अस्वीकृति को लेकर थीं। वहीं 34 फीसदी शिकायतें पेंशन में देरी को लेकर थीं। जबकि 7 फीसदी शिकायतें ट्रेनों में सर्विस क्वॉलिटी (फटी हुई सीटें, टॉयलेट में साबुन या पानी का न होना) और ट्रेनों के वक्त पर न चलने को लेकर थीं। 

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बैंकिग सर्विसेज

बैंकिग सेवाओं में सबसे ज्यादा शिकायतों बुजुर्गों की रहीं। विभाग में 2012-15 तक कुल 65,095 शिकायतें आईं, जबकि अकेले 62793 शिकायतें 2016-17 में आईं। इनमें 30 फीसदी शिकायतें पेंशन वक्त पर न देना और पेशन खातों के ट्रांसफर में देरी को लेकर रहीं। वहीं 20 फीसदी शिकायतें सही दस्तावेज देने के बावजूद लोन नहीं देना, तय लोन से कम पैसा जारी करना और लोन की शर्तों का पालन नहीं करना रहीं। जबकि 6 फीसदी शिकायतें सरकार की योजनाओं जैसे अटल पेंशन योजना, सुकन्या समृद्धि योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी को लेकर रहीं। 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय

मंत्रालय को 2012 से 15 तक 26,836 शिकायतें मिलीं, जबकि 2016-17 में 8646 शिकायतें दर्ज की गईं। संस्था ने अपने सर्वे में पाया कि 66 फीसदी शिकायतें एलपीजी गैस कनेक्शन देने में देरी और सब्सिडी ट्रांसफर में देरी या न मिलना, 29 फीसदी शिकायतें सिलेंडरों की कालाबाजारी, ज्यादा पैसे वसूलना और गैस सिलेंडरों से गैस चोरी में गैस एजेंसी के कर्मचारियों की मिलीभगत से संबंधित रहीं। 

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (इनकम टैक्स)

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इनकम टैक्स को 2016-17 में 24066 शिकायतें मिलीं। इनमें से 70 फीसदी शिकायतें रिफंड में देरी की रहीं, शिकायतकर्ताओं के मुताबिक रिफंड पाने में महीनों से लेकर सालों का वक्त लग रहा है। जबकि 19 फीसदी शिकायतें आईटी रिटर्न, पैन कार्ड प्रक्रिया से संबंधित रहीं। 5 फीसदी शिकायतें वेबसाइट की टेक्निकल दिक्कतों और 4 फीसदी इनकम टैक्स अफसरों की कार्यशैली को लेकर रहीं। 

पासपोर्ट से संबंधित

हाल ही में हुए तन्वी सेठ मामले ने विदेश मंत्रालय के पासपोर्ट विभाग की कई कमियों को उजागर किया है। मंत्रालय को 8166 शिकायतें मिलीं, जिनमें से पासपोर्ट में देरी और पुलिस वैरिफिकेशन से संबंधित 75 फीसदी शिकायतें दर्ज हुईं। 21 फीसदी शिकायतें पासपोर्ट नवीनीकरण और 4 फीसदी रीजनल पासपोर्ट ऑफिस में कस्टमर केयर से कोई जवाब नहीं मिलने और फाइलों के खोने से संबंधित रहीं।  

स्वास्थ्य सेवाएं

स्वास्थ्य मंत्रालय को मिली शिकायतों में सीजीएचएस यानी केन्द्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित रहीं। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 3 सालों में 27,552 शिकायतें मिलीं, वहीं 13700 शिकायतें साल 2016-17 में मिलीं। सीजीएचएस सेंटर सर्विस क्वॉलिटी, जिनमें डॉक्टरों और स्टॉफ से संबंधित 25 फीसदी, सीजीएचएस रिअंबर्समेंट से जुड़ी 7 फीसदी, दवाओं की खरीद को लेकर 7 फीसदी और मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों से जुड़ी 18 फीसदी शिकायतें मिलीं। 
 
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