2,217 मरीजों की जांच की गई
प्रोफेसर रश्मी प्रसाद ने कहा, अध्ययन के दौरान 2,217 मरीजों की जांच की गई थी। अध्ययन भारत और यूरोप में टाइप-2 डायबिटीज के विभिन्न रूपों के बीच अनुवांशिक समानता और अंतर को उजागर करता है। उन्होंने बताया कि उनका यह अध्ययन पश्चिमी भारत में 821 मरीजों पर आनुवंशिक जोखिम स्कोर विश्लेषण (जीआरएस) पर आधारित हैं।हम इसे भारत में टाइप-2 डायबिटीज को लेकर एक रोमांचक नए कदम के रूप में देखते हैं।
47 फीसदी भारतीय मरीजों में एसआईडीडी
अध्ययन में 47 फीसदी भारतीय मरीजों में इंसुलिन की कमी वाला डायबिटीज यानी एसआईडीडी मिला है। यह डायबिटीज का ऐसा प्रकार है जो रोगी में देरी से अपना प्रभाव दिखाता है। प्रसाद का कहना है कि प्रारंभिक जीवन में भारतीयों में कुपोषण टाइप-2 डायबिटीज की एक बड़ी वजह हो सकती है।