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सेहत: कुपोषण और मोटापा रोकने से डायबिटीज का खतरा कम, भारत और यूरोप के रोगियों का किया गया विश्लेषण

Thu, 04 May 2023 05:05 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी भारत की है और यहां डायबिटीज के रोगियों की संख्या करोड़ों में है। इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि भारतीयों में कुपोषण को लेकर अगर काम किया जाए तो टाइप-2 डायबिटीज को भी रोका जा सकता है।
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डायबिटीज की समस्या और उपचार - फोटो : istock
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विस्तार
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एक अध्ययन के जरिये वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अगर भारत में कुपोषण और मोटापे के खिलाफ काम किया जाए तो इसका सीधा असर टाइप-2 डायबिटीज पर भी पड़ेगा। अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि इसके जरिये देश में टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों के इलाज में सुधार किए जा सकते हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी भारत की है और यहां डायबिटीज के रोगियों की संख्या करोड़ों में है। इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि भारतीयों में कुपोषण को लेकर अगर काम किया जाए तो टाइप-2 डायबिटीज को भी रोका जा सकता है। इसी तरह भारत में डायबिटीज के रोगियों का दूसरा सबसे बड़ा समूह मोटापे से जुड़ा है, जिसे एमओडी कहा जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन बी-12 की कमी की वजह से एमओडी काफी तेजी से बढ़ रहा है। स्वीडन में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दिखाया कि डायबिटीज को पांच उप समूहों में विभाजित कर सकते हैं। साथ ही इनमें से चार उपसमूहों के बीच आनुवंशिक अंतर है। द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में पुष्टि हुई है कि पश्चिमी राज्यों के डायबिटीज के रोगियों से मिलती वर्गीकरण प्रणाली का पता चला है।
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2,217 मरीजों की जांच की गई
प्रोफेसर रश्मी प्रसाद ने कहा, अध्ययन के दौरान 2,217 मरीजों की जांच की गई थी। अध्ययन भारत और यूरोप में टाइप-2 डायबिटीज के विभिन्न रूपों के बीच अनुवांशिक समानता और अंतर को उजागर करता है। उन्होंने बताया कि उनका यह अध्ययन पश्चिमी भारत में 821 मरीजों पर आनुवंशिक जोखिम स्कोर विश्लेषण (जीआरएस) पर आधारित हैं।हम इसे भारत में टाइप-2 डायबिटीज को लेकर एक रोमांचक नए कदम के रूप में देखते हैं।
 
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47 फीसदी भारतीय मरीजों में एसआईडीडी
अध्ययन में 47 फीसदी भारतीय मरीजों में इंसुलिन की कमी वाला डायबिटीज यानी एसआईडीडी मिला है। यह डायबिटीज का ऐसा प्रकार है जो रोगी में देरी से अपना प्रभाव   दिखाता है। प्रसाद का कहना है कि प्रारंभिक जीवन में भारतीयों में कुपोषण टाइप-2 डायबिटीज की एक बड़ी वजह हो सकती है।
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