राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष में दरार लाने की कोशिशों में जुटी भाजपा का जायका शिवसेना ने खराब कर दिया है। दरअसल उम्मीदवार चुनने का सर्वाधिकार प्रधानमंत्री को देने संबंधी प्रस्ताव पेश करने के लिए लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान तो तैयार हैं, मगर शिवसेना ने साफ कर दिया है कि वह चेहरा सामने आने के बाद ही इस पर निर्णय लेगी।
हालांकि भाजपा को अब भी शिवसेना से समर्थन हासिल होने का पूरा भरोसा है, मगर शिवसेना के रुख से उम्मीदवार चुनने का सर्वाधिकार सर्वसम्मति से पीएम को देने की योजना में अड़ंगा लग गया है। दरअसल भाजपा की रणनीति एनडीए की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर उम्मीदवार चुनने का अधिकार प्रधानमंत्री को देने की थी।
बजट सत्र के बाद हुई एनडीए की बैठक में अगला चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लड़ने संबंधी प्रस्ताव पेश करने वाले पासवान इस बार भी इस आशय का प्रस्ताव लाने के लिए राजी थे। एनडीए के अन्य सहयोगी दल भी इस प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए राजी थे। मगर शिवेसना के रुख से पार्टी की योजना गड़बड़ा गई है।
हालांकि रणनीतिकारों को अब भी भरोसा है कि जहां तक समर्थन का सवाल है तो भाजपा के उम्मीदवार को शिवसेना का साथ जरूर मिलेगा। गौरतलब है कि इससे पहले दो चुनावों में शिवसेना ने भाजपा के इतर दूसरी लाइन लेते हुए यूपीए के उम्मीदवारों प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया था। इस बार शिवसेना ने पहले संघ प्रमुख और बाद में कृषि वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन का नाम सुझाया है।
आडवाणी की उम्मीदवारी के समर्थन में लगे पोस्टर
भाजपा में राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी पर जारी सस्पेंस के बीच पार्टी मुख्यालय सहित कई अन्य जगहों पर वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के समर्थन में पोस्टर लगे। इस पोस्टर में राष्ट्रपति पद के लिए आडवाणी को सबसे योग्य उम्मीदवार बताया गया।
हालांकि, पार्टी मुख्यालय और इसके आसपास लगे पोस्टरों को तत्काल हटा लिया गया। गौरतलब है कि राष्ट्रपति पद की दौड़ में अरसे से आडवाणी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। पोस्टर पर अशोक तंवर का नाम और फोटो है। इसमें तंवर को गुर्जर समाज और किसान नेता बताया गया है।