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Presidential Elections 2022: यशवंत सिन्हा के नामांकन पर मजबूती से खड़ा दिखा विपक्ष, क्या आगे भी बना रहेगा ये साथ?

सार

ईडी जांच की परीक्षा से गुजर रहे राहुल गांधी इस अवसर पर न केवल उपस्थित रहे, बल्कि मजबूती से अपने स्टैंड पर कायम भी दिखे। यशवंत सिन्हा की उम्मीदवारी को उन्होंने दो विपरीत विचारधाराओं की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि आरएसएस अतिवादी सोच से ग्रस्त है जबकि उनकी सोच प्यार और शांति की है...
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राष्ट्रपति चुनाव 2022 के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान यशवंत सिन्हा के साथ राहुल गांधी - फोटो : Agency
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विस्तार
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विपक्षी दलों के राष्ट्रपति उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। उनके नामांकन के अवसर पर कांग्रेस सहित 17 विपक्षी पार्टियों के नेता उपस्थित रहे। यह इस अर्थ में महत्वपूर्ण है कि एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का नाम सामने आने के बाद विपक्षी खेमे के क़ई दलों के मुर्मू के साथ आने की बात कही जा रही थी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और जयराम रमेश के साथ-साथ इस अवसर पर शरद पवार, ममता बनर्जी, फारुख अब्दुल्ला, ए राजा, अखिलेश यादव और जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे। ये वे नेता हैं जो अपने-अपने क्षेत्रों में भाजपा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। यदि इन दलों का साथ आगे भी बना रहे तो 2024 की लड़ाई रोचक हो सकती है।

ईडी, सीबीआई के निशाने पर विपक्षी नेता

वर्तमान में जिस तरह एक के बाद एक विपक्ष के नेता ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी केंद्रीय एजेंसियों के निशाने पर आ रहे हैं, 2024 के रण में विपक्ष को एक साथ लाने के लिए यह बड़ा कारण बन सकता है। यदि पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता ममता बनर्जी, महाराष्ट्र से एनसीपी नेता शरद पवार और शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे, तेलंगाना से केसीआर, उत्तर प्रदेश से अखिलेश यादव-जयंत चौधरी और इसी प्रकार अन्य राज्यों के बड़े दल साथ आकर चुनाव लड़ते हैं तो इससे एनडीए के सामने मजबूत चुनौती दी जा सकती है। लोकसभा सीटों के मामले में इन राज्यों की कुल सीटें विपक्षी दलों को एक ऐसी लड़ाई का मैदान दे सकती हैं, जहां इनकी बढ़त आगामी लोकसभा की तस्वीर बदल सकती है।

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द्रौपदी मुर्मू के नाम पर बसपा, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और बीजू जनता दल ने अपना समर्थन एनडीए को अवश्य दे दिया है, लेकिन बाद की परिस्थितियों में यह समर्थन एनडीए खेमे को नहीं मिलने वाला है। इनके साथ आने से विपक्षी दलों के खेमे को मजबूती दे सकता है। शरद पवार जैसे दिग्गज नेता के होने से इस गठबंधन को मजबूती भी दी जा सकती है। कुछ राज्यों में विपक्षी दलों के परस्पर हित आपस में टकरा सकते हैं, लेकिन एक सहमति बनाकर इस लड़ाई को मजबूती दी जा सकती है।

दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ दिखे राहुल

ईडी जांच की परीक्षा से गुजर रहे राहुल गांधी इस अवसर पर न केवल उपस्थित रहे, बल्कि मजबूती से अपने स्टैंड पर कायम भी दिखे। यशवंत सिन्हा की उम्मीदवारी को उन्होंने दो विपरीत विचारधाराओं की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि आरएसएस अतिवादी सोच से ग्रस्त है जबकि उनकी सोच प्यार और शांति की है। अतिवादी विचारधारा एक छोटे समय के लिए होती है, जबकि प्यार स्थाई और हमेशा मौजूद रहता है। संभवतः राहुल गांधी इस बात के लिए अपने आपको आश्वस्त करना चाहते थे कि यह दौर ज्यादा समय तक चलने वाला नहीं है। पर क्या उनके पास इस स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए कोई विचार है? हाल के कांग्रेस की गतिविधियों को देखने के बाद बहुत भरोसे के साथ यह बात नहीं कही जा सकती।

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