राष्ट्रपति चुनाव के नामांकन, मतदान और वोटों की गिनती से लेकर रिजल्ट घोषित करने तक की प्रक्रिया में कई तरह की रौचक बातें शामिल होती हैं। क्या वोटों की गिनती खत्म होने से पहले ही तैयार हो जाता है विजयी उम्मीदवार का सर्टिफिकेट। कौन है वह शख्स, जिसे 24 घंटे के लिए दो दर्जन से अधिक कमांडो मिलते हैं। एक व्यक्ति, जिसके पास भारतीय निर्वाचन आयोग की सारी शक्ति आ जाती है। केंद्र की सत्ता में बड़े से बड़ा व्यक्ति भी उस व्यक्ति के सामने ऊंची आवाज में बात नहीं कर सकता। लोकसभा के महासचिव रहे और संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के साथ राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया को संपन्न करा चुके दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा ने ऐसे ही कई रहस्यों को सार्वजनिक किया है।
ये मेरी अथॉरिटी है, मुझे देखना है …
अमरउजाला डॉट कॉम के साथ बातचीत में एसके शर्मा ने कहा, राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचन अधिकारी के पास सारी शक्ति होती है। यूं भी कहा जा सकता है कि इस चुनाव का निर्वाचन अधिकारी खुद को 'भारतीय चुनाव आयोग' समझकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। पूर्व केंद्रीय मंत्री व भारतीय क्रिक्रेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष रहे एनकेपी साल्वे, राष्ट्रपति चुनाव के दौरान संसद भवन पहुंचे थे। उस वक्त सुभाष कश्यप, लोकसभा के महासचिव थे। निर्वाचन अधिकारी भी वही थे। एनकेपी साल्वे, सुभाष कश्यप के कमरे में पहुंचे। वे एक उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने का विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा, आप इसे रद्द नहीं कर सकते। इतना सुनते ही सुभाष कश्यप ने उन्हें विनम्र शब्दों में कहा, देखिये, ये मेरी अथॉरिटी है। मुझे देखना है कि क्या सही है और क्या गलत है। बतौर एसके शर्मा, राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचन अधिकारी की सीट पर बैठा व्यक्ति, भारतीय निर्वाचन आयोग की शक्तियों का इस्तेमाल करता है।
राष्ट्रपति चुनाव में ये है सर्टिफिकेट जारी होने की कहानी
आमतौर पर राष्ट्रपति चुनाव की वोटिंग के दौरान यह आभास हो जाता है कि कौन उम्मीदवार विजयी हो सकता है। वोटों की गिनती वाले दिन, चुनाव परिणाम घोषित होने में देरी न हो, इसके लिए कई बार विजयी उम्मीदवार का सर्टिफिकेट पहले से ही तैयार कर लिया जाता है। हालांकि ये सब गुप्त रखा जाता है। वह सर्टिफिकेट केवल निर्वाचन अधिकारी के पास होता है। जब गिनती चल रही होती है तो संभावित विजयी प्रत्याशी का सर्टिफिकेट तैयार कर लेते हैं। उसकी शुरुआत कुछ इस तरह से होती है कि मैं ...निर्वाचन अधिकारी, यह घोषणा करता हूं कि ...। जब स्पष्ट तौर से किसी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित दिखती है तो उसका सर्टिफिकेट गिनती से एक दिन पहले भी तैयार हो जाता है। जैसे ही गिनती खत्म होती है तो वह सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। इस मामले में वैसी ही गोपनीयता बरकरार रखी जाती है, जैसी बजट बनाते समय देखने को मिलती है। यहां तक कि चुनाव आयोग की भी इसकी भनक नहीं लगती। यह दस्तावेज केवल निर्वाचन अधिकारी के पास रहता है।
वोट क्लब पर जनसभा करने की मांगी इजाजत
एसके शर्मा के मुताबिक, राष्ट्रपति चुनाव के दौरान कई ऐसे उम्मीदवार भी आते रहे, जिन्हें नियमों के बारे में ज्यादा कुछ मालूम नहीं था। जैसे वोटों की गिनती के दौरान एक से ज्यादा प्रतिनिधि वहां मौजूद रहने की बात कहते। उन्हें समझाया जाता कि यहां पर एक उम्मीदवार का केवल एक ही लीगल प्रतिनिधि बैठ सकता है। अन्य किसी व्यक्ति को यहां आने की इजाजत नहीं है। अस्सी के दशक में एक उम्मीदवार, सुभाष कश्यप के पास आए। बोले, मुझे राष्ट्रपति पद के चुनाव में प्रचार करने के लिए वोट क्लब पर जनसभा करनी है। इसकी इजाजत दे दें। इस पर कश्यप मुस्कुराए। उम्मीदवार को बैठाया और उन्हें राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित नियमों की जानकारी दी। राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया के दौरान, सुप्रीम कोर्ट भी इस चुनाव से जुड़ी याचिका स्वीकार नहीं कर सकता।
किसे मिलते हैं इतने सुरक्षा कर्मी
गिनती वाले दिन एवं उससे पहले 'चुनाव अधिकारी' को दो दर्जन से अधिक सुरक्षाकर्मी मुहैया कराए जाते थे। कई बार तो कमांडो को वापस भेजना पड़ता था। सुभाष कश्यप के पास भी 15-20 सुरक्षा कर्मी होते थे। खास बात है कि जितनी सुरक्षा मतपेटियों की होती हैं, उससे ज्यादा सुरक्षा खाली डिब्बों को मिलती हैं। खाली डिब्बा कहां रखना है, ताले एवं सील ठीक हैं, आदि। जिस कमरे में ये पेटियां रखी होती हैं, उसके आगे कई सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाते हैं। यहां तक कि उस कमरे की छत को भी जांचा जाता है।