गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के नए युग की शुरुआत करने से पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि एक कर प्रणाली जीएसटी का लागू होना सही मायने में भारतीय लोकतंत्र को समर्पित है। 14 साल पहले शुरू हुई इस जीएसटी यात्रा को मैने बेहद करीब से देखा है। निजी तौर पर भी यह मेरे लिए बहुत संतोष देने वाला क्षण है।
सेंट्रल हॉल में जीएसटी पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि जीएसटी पर केंद्र व राज्य के बीच बिना तालमेल के यह निर्णय संभव नहीं था। करीब 18 बैठकें की गईं और सभी बैठकों में आम राय बनाई गई।
जीएसटी पर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात की गई। 2007 में पहली बार जीएसटी पर प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया था। मुझे भरोसा था कि जीएसटी लागू होगा, आखिरकार मेरा यकीन सही निकला।
जीएसटी लागू करना वैट लागू करने जैसा ही है। वैट लागू करने के दौरान शुरुआत में विरोध हुआ था। अब आधुनिक तकनीक की मदद से जीएसटी लागू होगा। उन्होंने कहा कि देश के लिए यह यादगार व ऐतिहासिक पल है। जीएसटी से प्रतिस्पर्धा के समान अवसर मिलेंगे।