केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक
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प्रसन्न आचार्य हों या फिर समाजवादी पार्टी के प्रो. राम गोपाल यादव, टीएमसी के डेरेक ओ ब्रायन या फिर कांग्रेस पार्टी, सबकी मजबूरी एक रही। समाजवादी पार्टी के प्रो. राम गोपाल यादव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि को छह महीने बढ़ाए जाने के वह विरोध में हैं, लेकिन इसका समर्थन करने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है। प्रो. राम गोपाल जैसी ही मजबूरी विपक्ष में बैठे अन्य राजनीतिक दलों ने भी बताई। कांग्रेस पार्टी ने भी राज्य में राज्यपाल शासन की अवधि बढ़ाने को अनुचित बताया। पार्टी के नेताओं ने राज्य में लोकसभा के साथ विधानसभा का चुनाव न कराने पर केंद्र सरकार के फैसले को आड़े हाथों लिया।
क्यों किया राष्ट्रपति शासन का समर्थन?
डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि जनवरी 2019 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा था कि चुनाव आयोग जब चाहे जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव करा सकता है। केंद्र सरकार तैयार है। ब्रायन का कहना है कि मार्च में केंद्रीय चुनाव आयोग के पर्यवेक्षकों ने भी उसे लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव करने संबंधी राय दी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ?
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इसका जवाब देना चाहिए। अंत में ब्रायन समेत कई सांसदों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कल राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्ति हो रही है। इतने कम समय में वहां विधानसभा चुनाव भी नहीं कराए जा सकते। इसलिए वह राज्य में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने के बिल का समर्थन करते हैं। यही मजबूरी प्रो. राम गोपाल ने भी बताई।