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Maharashtra: रामनाथ कोविंद ने कहा- लोकतंत्र में पारदर्शिता सुशासन के लिए बहुत जरूरी

Fri, 11 Feb 2022 05:53 PM IST
रोमा रागिनी अमर उजाला, मुंबई

सार

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुंबई के राजभवन में दरबार हॉल का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन की तरह मुंबई का राजभवन संविधान का प्रतीक है। 
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रामनाथ कोविंद ने दरबार हॉल का किया उद्घाटन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को मुंबई के राजभवन में दरबार हॉल का उद्घाटन किया। इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि 'दरबार' शब्द आजादी से पूर्व राजाओं से जुड़ा है लेकिन वर्तमान में इसका मतलब पारदर्शिता है, जो लोकतंत्र में सुशासन के लिए बहुत जरूरी है। 
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राष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली के राष्ट्रपति भवन की तरह मुंबई का राजभवन संविधान का प्रतीक है। दरबार में निजी और सीक्रेट कुछ नहीं होता। सबकुछ आमजन के सामने होता है। यहां तक की अब निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी जनता दरबार लगाकर लोगों से जुड़ते हैं। उन्होंने कहा कि नया दरबार नए इंडिया, नए महाराष्ट्र और जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक है।  हेरिटेज इमारतें ब्रिटिश काल की विरासत हो सकती है लेकिन इससे महाराष्ट्र का वैभवशाली वर्तमान और भविष्य जुड़ा है। 

उन्होंने मुंबई से जुड़े अपनी यादों को भी साझा किया। राष्ट्रपति ने कहा कि महाराष्ट्र में जरूर कुछ खास बात है, जिस कारण वो बार-बार खींचे चले आते हैं। राष्ट्रपति ने बताया कि उनके साढ़े चार साल के कार्यकाल में वे 12 बार महाराष्ट्र आ चुके हैं। वह मोरारजी देसाई के निजी सचिव थे, जब उन्होंने बॉम्बे राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला और मुंबई में राजभवन में शपथ ली। 
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गर्व की बात राजभवन में महाराष्ट्र के नक्शे का नेहरू ने किया उद्घाटन-ठाकरे
इस मौके पर मुख्यमंत्री उद्भव ठाकरे भी मौजूद रहे। ठाकरे ने कहा कि दरबार हॉल पिछली शताब्दी के विकास का गवाह है। यह गर्व की बात है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 30 अप्रैल 1960 को राजभवन में संयुक्त महाराष्ट्र के नक्शे का अनावरण किया था। ठाकरे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब हम विपक्ष में थे, तब साल में एक दो बार राजभवन आते थे। ठाकरे ने ये बयान महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के साथ बीजेपी के संबंध पर दिया। 

राष्ट्रपति कोविंद अपने चार दिवसीय महाराष्ट्र दौरे पर हैं। जिस दरबार हॉल का राष्ट्रपति ने उद्घाटन किया है, उसमें 750 लोग एक साथ बैठ सकते हैं। पुराने हॉल में बैठने की क्षमता 225 थी। इस हॉल में पुराने दरबार हॉल की अधिकांश विरासत सुविधाओं को बरकरार रखा गया है। पिछला दरबार हॉल 1911 में बनाया गया था और इसे वास्तुकार जॉर्ज विटेट द्वारा डिजाइन किया गया था। स्वतंत्रता के बाद, हॉल मुख्य रूप से संवैधानिक पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह से जुड़ा था।
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