सिपाही ब्रह्मपाल सिंह राष्ट्रीय राइफल्स कीर्ति चक्र (मरणोपरांत)
राष्ट्रीय राइफल्स के सिपाही ब्रह्मपाल सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। नवंबर 2017 को सूचना मिली थी कि एक गांव में तीन आतंकी मौजूद है। ब्रह्मपाल अकेले मकान में घुसे और आतंकियों की गोलीबारी का सामना करते हुए उन्होंने दो आतंकियों को मार गिराया। साथ ही उन्होंने अपने एक साथी को भी बाहर निकाला।
कांस्टेबल राजेंद्र कुमार नैण, सीआरपीएफ (मरणोपरांत)
लथपुरा कैंप में स्थित एक चार मंजिला भवन में तीन आतंकवादी घुस गए थे। सूचना मिलते ही वहां सुरक्षा दल पहुंच गए थे। भारी गोलीबारी के बीच राजेंद्र और उनके साथियों ने 10 साथियों को बाहर निकासा। 36 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में उन्होंने एक आतंकी को मार गिराया था। वह बेहोश होने तक आतंकियों से लोहा लेते रहे थे।
मेजर तुषार गाबा, जाट रेजीमेंट
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में 23 मई 2000 को आठ आतंकी घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे। 24 मई की सुबह मेजर गाबा अपने दल के साथ घुसपैठ को नाकाम करने के लिए तैनात हो गए। 25 मई की रात आतंकियों ने घुसपैठ का प्रयास किया। 26 मई की सुबह सुबह करीब साढ़े पांच बजे आतंकियों ने स्वचालित राइफल और ग्रेनेड का इस्तेमाल कर दल पर हमला कर दिया। हमले में एक सिपाही घायल हो गया। मेजर गाबा गोलीबारी के बीच 20 मीटर तक रेंगकर आतंकियों के पास पहुंचे और ग्रेनेड चला दिया। मेजर गाबा ने अपनी जान की परवाह किए बगैर एके 47 राइफल से तीन आतंकियों को ढेर कर दिया था।
हेड कांस्टेबल धनावड़े रविंद्र, शौर्य चक्र (मरणोपरांत)
पुलवामा स्थित जिला पुलिस लाइन में तीन आतंकी घस आए थे और आवासीय क्वार्टरों में भाग गए थे। इन आतंकियों का मुकाबला करते हुए रविंद्र शहीद हो गए थे। घायल होने और लगातार खून बहने के बावजूद अदम्य साहस का परिचय देते हुए रविंद्र ने अपना स्थान नहीं छोड़ा था। शहीद रविंद्र की माता जनता धवानड़े औक पत्नी वैशाली ने राष्ट्रपति से यह सम्मान प्राप्त किया।
हेड कांस्टेबर एएस कृष्णा, कांस्टेबल के दिनेश राजा और कांस्टेबल प्रफुल्ल कुमार, सीआरपीएफ
हथियारों से लैस दो आतंकवादी सुरक्षा बल के शिविर पर गोलीबारी करते हुए आ रहे थे। इनका मुकाबला कांस्टेबल दिनेश राजा, कांस्टेबल प्रफुल्ल और हेड कांस्टेबल कृष्णा कर रहे थे। आतंकियों की गोलीबारी का जवाब देते हुए तीनों ने सभी आतंकियों को ढेर कर दिया था।
कैप्टन मेजर वर्मा जयेश राजेश, राष्ट्रीय राइफल्स
सितंबर 2017 में आतंकियों के एक समूह ने कश्मीर में भागते हुए गोलियां चला दी थीं। कैप्टन जयेश ने मोर्चा समभालते हुए एक आतंकी को ढेर कर दिया था। एक आतंकी घर में छिप गया। कैप्टन जयेश गोलीबारी के बीच उसके पास पहुंचे और ग्रेनेड से उसे भी मार गिराया था। इस कार्रवाई में कैप्टन जयेश का दायां पैर घायल हो गया था।
कैप्टन कनेंद्र पाल सिंह, राष्ट्रीय राइफल
अक्टूबर 2017 में तीन आतंकी एक गांव में घुस गए थे। सूचना मिलने पर कैप्टन कनेंद्र ने गांव की घेराबंदी कर दी। इसपर आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी को ढेर कर दिया गया था। मार्च 2018 में कैप्टन कनेंद्र ने एक बार फिर आतंकियों को घेर लिया था। इसपर आतंकियों ने ग्रेनेड चला दिया था। कैप्टन कनेंद्र ने दो आतंकियों को मार गिराया था। पूरे ऑपरेशन में तीन आतंकी ढेर हो गए थे।
गनर रंजीत सिंह, राष्ट्रीय राइफल्स
आतंकियों से निपटने के लिए चलाए गए एक विशिष्ट ऑपरेशन में रंजीत को भागने के स्थान पर तैनात किया गया था। छह आतंकी एक घर से निकले और फायरिंग करने लगे। रंजीत की जांघ पर एक गोली लगी, लेकिन उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा और एक आतंकी को मार गिराया साथ ही दो को घायल भी कर दिया था।
मेजर आदित्य कुमार, गढ़वाल राइफल्स
नवंबर 2017 को एक गांव में चार आतंकी घुस आए थे। मेजर आदित्य ने आतंकियों की घेराबंदी करते हुए एक को नजदीकी मुठभेड़ मे मार गिराया। इसके साथ ही उन्होंने खिड़की से फायरिंग कर रहे एक और आतंकी को भी मार गिराया था।
मेजर पवन गौतम, राष्ट्रीय राइफल्स
31 मार्च 2018 को आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली। आतंरी एक मकान में छिपे थे। मेजर पवन दल के साथ मकान की ओर बढ़े तो आतंकियों ने गोलीबारी करने के साथ ग्रेनेड चला दिए। इस बीच मेजर पवन ने एक आतंकी को मार गिराया और एक साथी को बचाया। इसके बाद वह रेंगते हुए एक छिपे आतंकी की ओर बढ़े और उसे मार गिराया। इस ऑपरेशन में कुल सात आतंकी मार गिराए गए थे।
सैपर महेश, राष्ट्रीय राइफल्स
तीन अगस्त 2018 को जम्मू-कश्मीर के एक गांव में आतंकियों को घेर लिया गया था। आतंकियों ने जब भागने की कोशिश की तो महेश ने एक को मार गिराया और दूसरे को घायल कर दिया। अगली सुबह आतंकियों ने उनपर फिर फायरिंग की, इस दौरान उन्होंने एक और आतंकी को ढेर किया था।
कैप्टन अभिनव कुमार चौधरी, राष्ट्रीय राइफल्स
आठ अगस्त 2018 को पांच आतंकियों के होने की सूचना मिसी। कैप्टन अभिनव ने आतंकियों के बच निकलने के रास्ते को रोक दिया। गोलीबारी के बीच अभिनव आतंकियों के पास पहुंते और एक आतंकी को मार गिराया। ऑपरेशन में पांचों आतंकी मारे गए थे।
लांस नायक अयूब अली, राजपूताना राइफल्स
15 सितंबर 2018 को सूचना मिली कि कुछ आतंकी एक घर में छिपे हुए हैं। आतंकियों ने फायरिंग कर एक सैनिक को घायल कर दिया। यह देख अयूब आतंकी से भिड़ गए और उसे मार गिराया। उन्होंने दो घायल सैनिकों को बाहर निकालने में भी मदद की।
मेजर अमित कुमार डिमरी, राष्ट्रीय राइफल्स
10 सितंबर 2018 को पांच आतंकियों की जानकारी मिलने पर मेजर डिमरी के नेतृत्व में ऑपरेशन शुरू हुआ था। ऑपरेशन में उन्होंने दो आतंकियों को मार गिराया था। 21 सितंबर को उन्होंने फिर दो आतंकियों को ढेर किया। इसके बाद गोशाला में छिपे एक आतंकी को भी मेजर डिमरी ने ढेर किया था।
कैप्टन पी पाजकुमार (नौसेना मेडल)
नवंबर 2017 में ओखी तूफान के समय त्रिवेंद्रम में बचाव अभियान चल रहा था। कैप्टन राजकुमार ने एक मछुआरे को बिना नाइट विजन के और बिना सर्विसिंग वाले विमान की सहायता से 30 मिनट तक संघर्ष कर बचाया था।
इसके अलावा थलसेना अध्यक्ष बिपिन रावत समेत सेना, वायुसेना और नौसेना अधिकारियों को भी उत्कृष्ट सेवा के लिए मेडल दिए गए।
जनरल बिपिन रावत, सेनाध्यक्ष - परम विशिष्ट सेवा मेडल
लेफ्टिनेंट जनरल सुरेंद्र सिंह - अति विशिष्ट सेवा मेडल
लेफ्टिनेंट जनरल विपिन पुरी - विशिष्ट सेवा मेडल
लेफ्टिनेंट जनरल मुकुंद नरवणे - अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल
वाइस एडमिरल अजीत कुमार पी. - अति विशिष्ट सेवा मेडल, वायुसेना सेवा मेडल
एयर मार्शल बालकृष्ण सुरेश - अति विशिष्ट सेवा मेडल, वायुसेना मेडल
एयर मार्शल रघुनाथ मांबियार - अति विशिष्ट सेवा मेडल, वायु सेना मेडल
लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी कुमार - अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल
लेफ्टिनेंट जनरल पंकज कुमार श्रीवास्तव - अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल
ले. जनरल सुदर्शन श्रीकुमार - विशिष्ट सेवा मेडल
ले. जनरल एकरूप सिंह घुमन - अति विशिष्ट सेवा मेडल
एयर मार्शल सरदार हरपाल सिंह - अति विशिष्ट सेवा मेडल, वायुसेना मेडल
ले. जनरल शौकीन चौहान, सेवानिवृत्त - अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेना मेडल
ले. जनरल जसविंदर सिंह संधू - उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल
मेजर जनरल विजय ज्ञानदीप चौगले, सेवानिवृत्त - विशिष्ट सेवा मेडल
ले. जनरल सरनजीत सिंह - उत्तम युद्ध सेवा मेडल
ले. ज. वाई. वी. कृष्णमेहन - सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल
ले. ज. संजय वर्मा - विशिष्ट सेवा मेडल
ले. ज. जगदीप कुमार शर्मा - अति विशिष्ट सेवा मेडल
ले. ज. उमेश कुमार शर्मा - अति विशिष्ट सेवा मेडल
ले. जनरल परमजीत सिंह - विशिष्ट सेवा मेडल
ले. जनरल ताराकांत उपासने - सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल
ले. जनरल अनंत प्रसाद सिंह - सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल
ले. जनरल योगेंद डिमरी - विशिष्ट सेवा मेडल
ले. जनरल सुरेंद्र कुमार पाराशर - विशिष्ट सेवा मेडल
वाइस एडमिरल सुनील आनंद - नौसेना मेडल
एयर मार्शल अमित तिवारी - वायुसेना मेडल
एयर मार्शल अमित देव - विशिष्ट सेवा मेडल
ले. जनरल गिरिराज सिंह, सेवानिवृत्त - सेना मेडल
मे. जनरल आलोक राज - सेना मेडल
मे. जनरल तेजपाल सिंह रावत - विशिष्ट सेवा मेडल
मे. जनरल बंसी पोनप्पा - विशिष्ट सेवा मेडल
मेजर जनरल गजेंद्र सिंह - विशिष्ट सेवा मेडल
रियर एडमिरल मकरंद अरविंद हंपीहोली - नौसेना मेडल
रियर एडमिरल, दिनेश त्रिपाठी - नौसेना मेडल
एयर वाइस मार्शल बिजूश मुखर्जी - विशिष्ट सेवा मेडल
मेजर जनरल परमजीत सिंह संधू - विशिष्ट सेवा मेडल
एयर मार्शल सौमित्र कुमार डे, सेवानिवृत्त - विशिष्ट सेवा मेडल
ब्रिगेडियर संजीव लांगे - सेना मेडल
एयर कोमोडेर, धनंजय वसंत - वायुसेना मेडल
एयरकोमोडोर, जॉर्ज थॉमस - वायुसेना मेडल