65वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से पुरस्कृत होने वाले 70 से ज्यादा विजेताओं ने कथित तौर पर गुरुवार को नई दिल्ली में होने वाले समारोह से दूर रहने का फैसला किया है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा सभी विजेताओं को व्यक्तिगत रूप से पुरस्कार वितरण करने में असमर्थता जताने के विरोध में ये फैसला लिया गया है।
फिल्म समारोह निदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक चैतन्य प्रसाद को विजेताओं ने एक चिट्ठी लिखकर कहा है कि उनका कदम "बहिष्कार" नहीं, बल्कि राष्ट्रपति के फैसले पर उनकी निराशा की अभिव्यक्ति है।
उधर स्मृति इरानी के हाथ से पुरस्कार लेने का बहिष्कार कर रहे एक फिल्म मेकर मेघदूत ने कहा है कि राष्ट्रपति को हमें वह पुरस्कार प्रस्तुत करना चाहिए जो हमारा अधिकार है। यह पुरस्कार राष्ट्रपति द्वारा देने की परंपरा है। उन्होंने अपने बयान में ये भी कहा कि राष्ट्रपति को पुरस्कार देने में एक मिनट लगता है।
पहले यह घोषणा की गई थी कि कोविंद 137 विजेताओं में से 11 में पुरस्कार पेश करेंगे क्योंकि पुरस्कार वितरण के स्थल विज्ञान भवन में पूरे समारोह के दौरान उपस्थित नहीं रह सकेंगे। इस घोषणा ने बाद विजेताओं के बीच काफी निराशा पैदा हो गई। बुधवार को पुरस्कार समारोह के अभ्यास स्थल पर पहुंचीं सूचना प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने इस मसले पर अपनी बात रखी लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं हो सकीं।
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता मराठी फिल्म निर्देशक प्रकाश ओक ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, "हम अपमानित महसूस कर रहे हैं। करीब 75 विजेताओं ने समारोह के बहिष्कार की धमकी दी है।"