रईसी की जीत के साथ ही ईरान सरकार पर कट्टरपंथियों की पकड़ और मजबूत होना तय है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान के पटरी से उतर चुके परमाणु करार को बचाने की कोशिश के तहत वैश्विक ताकतों के साथ वियना में वार्ता जारी है। ईरान फिलहाल यूरेनियम का बड़े स्तर पर संवर्धन कर रहा है। इसे लेकर अमेरिका व इस्राइल के साथ उसका तनाव जारी है। उधर, प्रतिबंधों के तहत उसकी अर्थव्यवस्था भी तेल और गैस की बिक्री रुकने के कारण खस्ताहाल है। ऐसे में कट्टरपंथियों का मजबूत होकर उभरना समझौते की राह में बड़ा रोड़ा बन सकता है।
मजहबी आस्था के प्रतीक हैं रईसी
ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख रहे मौलवी रईसी ने ईरानी मतदाताओं वादा किया है कि वे देश में भ्रष्टाचार पर काबू पाने के साथ आर्थिक समस्याओं को दूर करेंगे। वे ईरान की सबसे समृद्ध सामाजिक संस्था और मशहाद शहर में मौजूद आठवें शिया इमाम अली रजा की पवित्र दरगाह आस्तान-ए-कुद्स के संरक्षक भी रह चुके हैं। रईसी हमेशा काली पगड़ी बांधते हैं जो इस बात का प्रतीक है कि व सैय्यद हैं।
पहले से पक्की हो चुकी थी जीत
राष्ट्रपति चुनावों से पहले गार्जियन काउंसिल ने उम्मीदवारों के लिए कड़े नियम लागू किए थे। इसके चलते केवल सात उम्मीदवार ही चुनावी दौड़ में शामिल हुए। संसद के पूर्व स्पीकर अली लारिजानी समेत कई उम्मीदवारों को राष्ट्रपति पद की रेस में शामिल होने से पहले ही अयोग्य घोषित कर दिया गया। इस फैसले को सर्वोच्च नेता खामनेई का भी समर्थन मिला। यह सब रईसी के लिए एक तरह से जीत पक्की कर गया।