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विदाई भाषण में भावुक प्रणब दा ने तारीफ भी की, नसीहत भी दी

Mon, 24 Jul 2017 01:43 AM IST
amarujala.com, Presented By: अजय कुमार सिंह
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सम्मान समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी - फोटो : LOKSABHA TV
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संसद भवन में आयोजित विदाई समारोह में दिए गए अपने अंतिम भाषण में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी विपक्ष के साथ-साथ सरकार को भी सचेत कर गए। संसदीय कार्यवाही में व्यवधान पर जहां चिंता जता कर विपक्ष को तो बार-बार अध्यादेश का सहारा लेने पर सरकार को नसीहत दी।
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संसद में चर्चा के गिरते स्तर, बहिष्कार, व्यवधान को देशवासियों के साथ अन्याय बताया और चर्चा के लिए लगातार कम होते समय पर गहरी चिंता जताई। इस दौरान उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा का मुरीद बताया और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपना मेंटर बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान देश की गरिमा, 1.30 अरब लोगों की आत्मा और लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर संसद लोगों की अपेक्षाओं का प्रतीक है। संसद के जरिए सामाजिक, आर्थिक बदलावों की रूपरेखा बनाई जा सकती है। पहले संसद में बेहद गंभीर चर्चा होती थी। संसद उत्कृष्ट वक्ताओं से भरा था। अब व्यवधान, बहिष्कार सदन का नुकसान हो रहा है।
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संसद में चर्चा का समय घट रहा है। बिना चर्चा के बिलों का पास होना और नई नीति बनाना संसद की गरिमा के लिए अच्छी बात नहीं है। यह सवा अरब लोगों की अपेक्षाओं के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सदन में चर्चा न होने का नुकसान विपक्ष को सबसे ज्यादा होता है। 

इसी दौरान राष्ट्रपति ने अध्यादेश की आवश्यकता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मेरा दृढ़ मत है कि अध्यादेश के मार्ग का उपयोग महज विशेष या आपात स्थिति में ही किया जाना चाहिए। मौद्रिक या आर्थिक मुद्दों पर तो इसका कतई सहारा नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का संविधान हमें अध्यादेश लाने का अधिकार देता है, मगर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस मार्ग का उपयोग विशेष परिस्थिति में ही किया जाए।

 
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पीएम की ऊर्जा का मुरीद, इंदिरा मेरी मेंटर

प्रणब मुखर्जी - फोटो : SELF
अपने भाषण के दौरान मुखर्जी कई बार भावुक हुए। उन्होंने कहा कि मैं 34 साल के उम्र में राज्यसभा पहुंचा था। 22 जुलाई 1969 को पहले बैठक में शिरकत की। मुझे संसद ने एक व्यक्ति के रूप में निर्मित किया और लोकतंत्र के सबसे बड़े इस मंदिर में मेरी रचना हुई। संसद में 37 साल का सफर 13वें राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने के बाद खत्म हो गया। उन्होंने कहा कि अब मैं संसद का हिस्सा नहीं रहूंगा। यादों का इंद्रधनुष ले कर बेहद खुशी के साथ आपसे विदा ले रहा हूं।

राष्ट्रपति ने इस दौरान प्रधानमंत्री की ऊर्जा और उनके साथ बिताए पल को याद किया। उन्होंने कहा कि वह पीएम मोदी की ऊर्जा का मुरीद हूं। पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को अपना मेंटर बताते हुए उन्होंने आपातकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा बेहद निडर महिला थी। आपातकाल खत्म होने केबाद जब उनके साथ पहली बार लंदन गया तो पत्रकारों ने इंदिरा से पूछा आपको आपातकाल लागू करने से क्या मिला? पलटते हुए उन्होंने कहा कि इस दौरान हमने 21 महीने में देश के सभी तबकों को एक साथ किया। इसके बाद हीथ्रो एयरपोर्ट केलाउंज में सन्नाटा छा गया।

पुराने दौर को याद करते हुए जहां राष्ट्रपति ने भूपेश गुप्ता, मधु लिमये, अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। उन्होंने कहा कि इन शानदार वक्ताओं से उन्होंने बहुत कुछ सीखा। उन्होंने कहा तब स्वतंत्रता सेनानियों से सदन भरा हुआ था अब सोनिया-आडवाणी जैसे सुलझे लोग इस सदन का हिस्सा हैं।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने को राष्ट्रपति ने विविधता में एकता का प्रतीक बताया। कहा कि यह हमारे लोकतंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह गरीबों की दशा सुधारने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।
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