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भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष ने बनाई आंदोलन से दूरी, टिकैत ने कहा - मांगे नहीं मानी, तो खामियाजा भुगतने को तैयार रहें

Mon, 30 Nov 2020 11:12 PM IST
दीप्ति मिश्रा राहुल संपाल, नई दिल्ली
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किसान आंदोलन - फोटो : पीटीआई
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नए कृषि कानून के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। लगातार पांचवें दिन किसानों ने दिल्ली की सीमा को घेर रखा है। किसानों के संगठन का कहना है कि ये आंदोलन नहीं है बल्कि क्रांति है। हम लड़ते रहेंगे, लेकिन दिल्ली छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। दूसरी तरफ भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष और फतेहपुर सीकरी से सांसद राजकुमार चाहर कहते हैं कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है और नए कानून किसानों के हित में है।

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आगरा में मौजूद राजकुमार चाहर ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि इस मामले में संगठन कुछ नहीं कर सकता, जो करेगी केंद्र सरकार करेगी। किसानों से चर्चा के लिए सरकार ने दरवाजे खोल रखे हैं। अब किसानों को आगे आकर अपनी बात रखनी चाहिए। चाहर के मुताबिक, पहले के कानून में जो बात थी, सरकार ने उन नियमों में कोई बदलाव नहीं किए हैं। किसान क्या संशोधन चाहते हैं, क्या बदलाव हो सकते हैं, इसलिए सरकार हर स्तर पर बातचीत करने के लिए तैयार है। आंदोलनकारी किसान आकर बात करें।

दिल्ली में किसानों से मिलने जाने के सवाल पर चाहर ने कहा कि फिलहाल में आगरा में हूं।किसानों से मिलने जाने में मुझे कोई परेशानी है। मैं खुद किसान परिवार से आता हूं, लेकिन किसान किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं से मिलने के लिए तैयार ही नहीं है। ये विषय सरकार से संबंधित है और हमें उम्मीद है कि जल्द हल निकलेगा।
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लोगों को परेशानी होगी, तो उसके लिए केंद्र जिम्मेदार : राकेश टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने अमर उजाला से कहा कि ये कोई किसान आंदोलन नहीं है बल्कि किसान क्रांति है। किसानों को इस बार कोई भी आश्वासन नहीं चाहिए। हम लोग कोई भीख नहीं मांग रहे हैं बल्कि अपना हक सरकार से मांग रहे है। जब तक हमें हमारा हक नहीं मिल जाता तब तक हम यहां से जाएंगे नहीं। इस बार आश्वासन लेकर नहीं जाएंगे।

इस बार किसान आरपार की लड़ाई के मूड में है। सरकार ने हमारी मांगे नहीं मानी, तो उन्हें किसान सबक सिखाएंगे। मोदी सरकार की जीत में किसानों की बड़ी भूमिका रही है। लेकिन सरकार अब किसानों के साथ ही धोखा कर रही है। केंद्र सरकार के कृषि कानून को हम लागू नहीं होने देंगे। ये कानून किसान विरोधी है। सरकार अगर हमारी मांगे नहीं मानती है, तो खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहे। हम लड़ते रहेंगे, लेकिन दिल्ली छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। अगर हमे दबाने की कोशिश हुई, तो हमारा आगे का ब्लू प्रिंट तैयार है। दूध,सब्जी और राशन सबकी सप्लाई पूरी तरह से बंद हो जाएगी। लोगों को परेशानी होगी इसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी। 
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