भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि समुद्री क्षमता का पूरा दोहन करने से पहले भारत को देश के बंदरगाहों की ढांचागत और परिचालन समेत कई चुनौतियों से निपटने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘समुद्र पार करने के बारे में दशकों पुरानी नीतियां हमपर भारी पड़ीं, लेकिन अब 200 साल बाद ही सही हम इन सबसे बाहर आ गए हैं। अब महाद्वीपीय विकास पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।’
चेन्नई स्थित भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) के आठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, 'निश्चित तौर पर हमारे पास उस समय आर्थिक और औद्योगिक संसाधनों की भी कमी थी। अब देश इस क्षेत्र की क्षमता का पूरी तरह से दोहन कर सके, उससे पहले उसे कई और चुनौतियों से निपटना चाहिए।’
उन्होंने कहा कि इसे उदाहरण से समझा जा सकता है। जैसे- गहराई संबंधी प्रतिबंधों के कारण बहुत सारे कंटेनर शिप कार्गो को पास के विदेशी बंदरगाहों पर मोड़ दिया जाता है। ऐसे में, व्यापारी और नागरिक जहाज निर्माण उद्योग में, हमें दक्षता, प्रभावकारिता और प्रतिस्पर्धा के उच्चतम मानकों का लक्ष्य रखने की आवश्यकता है। दुनिया भर के 50 सर्वश्रेष्ठ कंटेनर बंदरगाहों की सूची में भारत के केवल दो हैं।
गौरतलब है, इस महीने की शुरुआत में ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट के तीसरे संस्करण ने 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित किया, जो 'अमृत काल विजन 2047' को प्राप्त करने में मदद करेगा।