'आदिवासी समाज आगे बढ़ेगा, तभी देश भी सही मायनों प्रगति करेगा'
मुर्मू ने कहा कि जनजातीय समाज के विकास पर खास ध्यान देने के पीछे का विचार यह है कि जब आदिवासी समाज आगे बढ़ेगा, तभी हमारा देश भी सही मायनों प्रगति करेगा। उन्होंने आगे कहा कि जनजातीय समाज की शिल्पकला, भोजन, पोशाक, आभूषण, चिकित्सा पद्धतियां, घरेलू उपकरण और खेल हमारे देश की अनमोल विरासत हैं। साथ ही वे आधुनिक और वैज्ञानिक भी हैं, क्योंकि वे प्रकृति के साथ सामंजस्य और एक स्थायी जीवनशैली के आदर्शों को प्रदर्शित करते हैं।
जनजातीय समाज के विकास के लिए हो रहे बहुआयामी प्रयास
उन्होंने आगे कहा कि जनजातीय कल्याण बजट आवंटन तीन बढ़ाकर करीब 15 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है। जनजातीय समाज के विकास पर खास ध्यान देने के पीछे विचार यह है कि जब जनजातीय समाज आगे बढ़ेगा, तभी हमारा देश भी सही मायने में आगे बढ़ेगा। इसीलिए जनजातीय अस्मिता के प्रति गर्व की भावना को बढ़ाने के साथ-साथ जनजातीय समाज के विकास के लिए तेज गति से बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं।
'जनजातीय समाज के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रगति'
राष्ट्रपति ने इस बात पर खुशी जताई कि जनजातीय समाज के आर्थिक सशक्तिकरण और रोजगार की दिशा में काफी प्रगति हो रही है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सिकल सेल एनीमिया को खत्म करने के लिए शुरू किया राष्ट्रीय मिशन
मुर्मू ने कहा, यह खुशी की बात है कि देशभर में 470 से अधिक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के जरिए जनजातीय समुदाय के 1.25 लाख बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं। पिछले दस वर्षों में जनजातीय बहुल इलाकों में 30 नए मेडिकल कॉलेज बनाए गए हैं। इसके अलावा, जनजातीय समाज में स्वास्थ्य से जुड़ी एक विशेष समस्या को हल करन के लिए कए राष्ट्रीय मिशन शुरू किया गया है। इस मिशन के तहत वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंदर स्टेडियम में जनजातीय मामलों के मंत्रालय की ओर से 16 फरवरी से 24 फरवरी 2025 तक आदि महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव का मकसद देश के जनजातीय समुदायों की समृद्ध और विविधता भरी पारंपरिक संस्कृति की झलक दिखाना है।
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