राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने करोड़ों भारतीयों की तरह गणेशोत्सव मनाया। परिवार के साथ रोजाना दो बार पूजा-आरती भी की। खास बात रही कि राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह कार्यक्रम उनके आवासीय परिसर में निजी तौर पर किया गया। राष्ट्रपति ने धार्मिक अनुष्ठानों को राष्ट्रपति भवन में निजी तौर पर मनाने की पहल की है। इसलिए उन्होंने राष्ट्रपति भवन को आधिकारिक रूप से ऐसे कार्यक्रमों से अलग कर लिया है। उनका मानना है कि धार्मिक कार्यक्रमों में सरकारी खर्च करना सही नहीं है।
इस साल राष्ट्रपति द्वारा इफ्तार आयोजित न करने पर काफी चर्चा हुई, लेकिन यह कोविंद द्वारा बनाए नियमों के अनुरूप लिया गया फैसला था। हालांकि ईद पर वह राष्ट्रपति भवन परिसर में स्थित मस्जिद गए और सभी कर्मचारियों और उनके परिवारजनों को ईद की मुबारकबाद दी, गले मिले और उपहार दिए।
इसी तरह हर वर्ष गुरु पर्व पर पाठ के दौरान चार दिनों के लिए राष्ट्रपति भवन का हॉल खाली कराने की व्यवस्था भी बंद कर दी। इस बार प्रकाशोत्सव तो मना, लेकिन परिसर में स्थित गुरुद्वारे में। कोविंद सभी पर्वों को मनाते हैं, लेकिन सरकारी खजाने का एक पैसा भी इन आयोजनों पर खर्च नहीं करते।
नेहरू और प्रसाद के मतभेद
देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के राष्ट्रपति भवन में पूजा और हवन करने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सख्त आपत्ति थी। उन्होंने कई पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन में धार्मिक गतिविधियां नहीं करने का अनुरोध किया था, लेकिन राजेंद्र प्रसाद ने तो उनकी बात नहीं सुनी।
पहले भी लीक से हटे कोविंद
इससे पहले भी कोविंद ने कई लीक से हटकर परंपराएं शुरू की हैं। वह उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के साथ सुबह का नाश्ता कर रहे हैं और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ बैठकर उनकी समस्याओं का निराकरण भी करा रहे हैं। उन्होंने गणतंत्र दिवस पर आयोजित स्वागत समारोह में अतिथियों की संख्या 2000 से कम कर 700 कर दी है।