राष्ट्रपति पद पर सोमवार को मतदान संपन्न हुआ तो मंगलवार को उप राष्ट्रपति पद पर भाजपा नेता वेंकैया नायडू ने नामांकन कर दिया। इसी के साथ ही देश में राजनीति के नए अध्याय की राह तैयार हो गई।
दोनों पदों पर अगर भाजपा नेताओं का चयन हो जाता है तो यह पहली बार होगा जब देश के चार शीर्ष पदों पर भाजपा का ही कब्जा होगा। इससे पहले भाजपा ने तीन शीर्ष पदों तक का ही सफर तय किया है, लेकिन मोदी लहर में जहां पूरे देश में एक के बाद एक भाजपा की सरकार बन रही हैं तब देश के चारों संवैधानिक पदों पर भाजपा नेताओं की नियुक्ति एक खास संदेश देती है।
संदेश इस बात का कि देश की राजनीति में अब भाजपा ही सबसे बड़ा अध्याय बन चुकी है।
देश में शीर्ष दो पद पर भाजपा नेता
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वर्तमान में प्रधानमंत्री के पद पर भाजपा नेता प्रधानमंत्री मोदी आसीन हैं तो लोकसभा के स्पीकर का पद भी भाजपा के ही पास है, जिस पर वरिष्ठ नेत्री सुमित्रा महाजन काबिज हैं। राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा ने पार्टी के बड़े दलित चेहरे और बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाया, जिनका चुना जाना लगभग तय भी है।
इसी तरह उप राष्ट्रपति पद के लिए अब वरिष्ठ भाजपा नेता और हाल तक केंद्रीय मंत्री रहे वेंकैया नायडू को उम्मीदवार बनाया गया है। उनका चुना जाना भी तय माना जा रहा है। ऐसे में देश के दोनों शीर्ष संवैधानिक पदों पर भाजपा नेताओं की नियुक्ति के साथ ही पहली बार चारों शीर्ष संवैधानिक पदों पर भाजपा का ही कब्जा होगा।
इससे पूर्व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में तीन शीर्ष पदों पर ही भाजपा नेताओं का कब्जा रहा है। जिनमें प्रधानमंत्री, उप प्रधानमंत्री के अलावा राष्ट्रपति का पद भी था। उस दौर में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे तो उनके नायब के तौर पर उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आड़वाणी थे।
कई दशक बाद चारों पदों पर होगा एक ही पार्टी का कब्जा
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उस समय उप राष्ट्रपति के पद पर पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भैरों सिंह शेखावत थे। हालांकि उस समय राष्ट्रपति वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रधानमंत्री वाजपेयी के सुरक्षा सलाहकार रहे अब्दुल कलाम को बनाया गया था जबकि स्पीकर का पद हमेशा गठबंधन के घटक दलों के पास रहा था।
जिसमें एक दौर में अन्नाद्रमुक नेता जीएमसी बालयोगी का कब्जा रहा तो उनकी आकस्मिक मृत्यु के बाद शिवसेना नेता मनोहर जोशी का। हालांकि उस दौर में उप प्रधानमंत्री का पद होने के कारण पांच शीर्ष पद रहे थे।
खास बात ये है कि गठबंधन की राजनीति का दौर शुरू होने के बाद यह दशकों बाद पहली बार ऐसा मौका आया है जब देश के चारों शीर्ष पदों पर एक ही पार्टी का कब्जा रहा है।
इससे पूर्व की यूपीए सरकार में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और स्पीकर का पद कांग्रेस के पास था लेकिन उप राष्ट्रपति के पद पर वरिष्ठ शिक्षाविद हामिद अंसारी को चुना गया। जबकि उससे पूर्व की कांग्रेस सरकार में भी के आर नारायणन उप राष्ट्रपति और राष्ट्रपति के पद पर गैर राजनीतिक शख्सियत थे।
वहीं 80 के दशक के अंत में जितनी सरकारें रहीं वहां भी गठबंधन का दबदबा होने के कारण कभी भी चारों पद एक ही पार्टी के हिस्से में नहीं आ सके।