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पेपर लीक के दिन लदे: नए विधेयक को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी, दो महीने में जांच और 10 साल तक की जेल का प्रावधा

Sat, 01 Aug 2026 03:24 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन कानून, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। अब पेपर लीक मामलों की जांच दो महीने में पूरी होगी, राज्यों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे और दोषियों के लिए 5 से 10 वर्ष तक की सजा, 50 लाख रुपये तक जुर्माना तथा संगठित अपराध के मामलों में 7 वर्ष की न्यूनतम सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनुचित तरीकों पर लगाम कसने के उद्देश्य से लाए गए पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई है। इस विधेयक को संसद के दोनों सदनों से इसी सप्ताह पारित किया गया था। शुक्रवार को कानून मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र (गजट) अधिसूचना में राष्ट्रपति की स्वीकृति की जानकारी दी गई।

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अब पेपर लीक मामलों की जांच कितने समय में पूरी होगी?
संशोधित कानून के तहत अब प्रश्नपत्र लीक से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य मामलों का जल्द निस्तारण सुनिश्चित करना और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई करना है।

आरोपियों को कितनी सजा और जुर्माना भुगतना होगा?
नए प्रावधानों के अनुसार, सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक कराने या अन्य अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले दोषियों को कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद की सजा हो सकती है। इसके साथ ही उन पर 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
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संगठित गिरोहों के लिए क्या है नया प्रावधान?
यदि प्रश्नपत्र लीक या परीक्षा में धांधली किसी संगठित अपराध के तहत की जाती है, तो ऐसे मामलों में दोषियों के लिए कम से कम 7 वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, ऐसे मामलों में 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।

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राज्यों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट क्यों बनाए जाएंगे?
संशोधित कानून में प्रत्येक राज्य में फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना का प्रस्ताव है, ताकि प्रश्नपत्र लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई तेजी से हो सके और दोषियों को जल्द सजा मिल सके।

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