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Defence Reforms: CDS बोले, इस साल जारी होगा सशस्त्र बलों के लिए रोडमैप 'विजन 2047', 2025 की प्राथमिकता भी बताई

Sun, 19 Jan 2025 09:44 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सशस्त्र बलों के लिए 'विजन 2047' रोडमैप पर काम चल रहा है। इसे इस साल के मध्य में जारी कर दिया जाएगा। थिएटर कमांड पर रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2025 में महत्वाकांक्षी सुधार लागू किए जाने हैं।
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राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री / जनरल अनिल चौहान, सीडीएस - फोटो : ANI
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विस्तार
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चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने रविवार को कहा कि एकीकृत थिएटर कमान को लेकर सरकार के समक्ष खाका पेश करना और इसे तैयार करना प्रमुख प्राथमिकता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के 2025 को 'रक्षा सुधारों का वर्ष' घोषित किए जाने के कुछ दिनों बाद सीडीएस ने यह बात कही।
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कई विषयों पर तैयार किया जा रहा संयुक्त खाका- सीडीएस
एक पॉडकास्ट में सीडीएस ने कहा कि मल्टी डोमेन ऑपरेशन, एयरबोर्न व हेलीबोर्न ऑपरेशन, नेटवर्क केंद्रित युद्ध, संयुक्त संचार, पारंपरिक मिसाइल बल, अंतरिक्ष, संयुक्त स्टाफ कार्य, संयुक्त लॉजिस्टिक आर्किटेक्चर जैसे विषयों पर संयुक्त खाका तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के लिए 'विजन 2047' रोडमैप पर काम चल रहा है। इसे इस साल के मध्य में जारी कर दिया जाएगा। थिएटर कमांड पर रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2025 में महत्वाकांक्षी सुधार लागू किए जाने हैं।

थियेटराइजेशन मॉडल के तहत सरकार सेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमताओं को एकीकृत करना चाहती है। इसके तहत सरकार युद्धों और अभियानों के लिए सेना के तीनों अंगों के संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना चाहती है।
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प्रत्येक थियेटर कमांड में होंगी तीनों सेनाओं की इकाइयां
थियेटराइजेशन योजना के तहत, प्रत्येक थियेटर कमांड में सेना, नौसेना और वायु सेना की इकाइयां होंगी। ये सभी एक निर्दिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए एक इकाई के रूप में काम करेंगी। वर्तमान में, सेना, नौसेना और वायु सेना के पास अलग-अलग कमांड हैं। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण लाने के लिए आठ कार्यक्षेत्रों का चयन किया गया है और इन कार्यक्षेत्रों के तहत 196 गतिविधियों पर काम पहले से ही चल रहा है। एकजुटता का मुख्य उद्देश्य ऐसी क्षमता विकसित करना है जो भविष्य में युद्ध की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखेगी और एकीकृत संरचनाएं बनाएगी जो बहु-डोमेन संचालन कर सकें। उन्होंने कहा कि भविष्य में सभी वांछित क्षमताओं को एक साथ रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
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